अधिकतर स्कूलों में नियमित प्रशिक्षित वोकेशनल टीचर उपलब्ध नहीं हैं। विभाग ने निजी एजेंसियों पर निर्भर होकर गेस्ट ट्रेनर नियुक्त किए हुए हैं जिनकी न तो उपस्थिति तय रहती है और न ही गुणवत्ता।
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में वोकेशनल कोर्स को लेकर बड़े दावे जरूर किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखती है। प्रदेश के 1348 स्कूलों में संचालित किए जा रहे वोकेशनल विषय वर्तमान में कई खामियों से घिरे हुए हैं जिसकी वजह से छात्रों और अभिभावकों में निराशा बढ़ रही है।
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सत्र 2024-25 में 1,248 स्कूलों में 1,89,349 विद्यार्थियों और 2025-26 में 1348 स्कूलों में 1,95,777 विद्यार्थियों ने नामांकन लिया है। अधिकतर स्कूलों में नियमित प्रशिक्षित वोकेशनल टीचर उपलब्ध नहीं हैं। विभाग ने निजी एजेंसियों पर निर्भर होकर गेस्ट ट्रेनर नियुक्त किए हुए हैं जिनकी न तो उपस्थिति तय रहती है और न ही गुणवत्ता। कई स्कूलों में महीने भर तक ट्रेनर नहीं पहुंचते, पर कागजों में कक्षाएं संचालित दिखा दी जाती हैं।
उदाहरण के तौर पर कुरुक्षेत्र के थानेसर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मोती बाग में दो महीनों से हेल्थकेयर ट्रेड का ट्रेनर नहीं पहुंचा। फरीदाबाद के सराय ख्वाजा स्कूल में आईटी ट्रेड का ट्रेनर एजेंसी ने बिना सूचना बदला जिससे छात्रों की पढ़ाई अधर में लटक गई थी।