-आदेश की प्रति महानिदेशक (जेल) को भेजने का निर्देश
-जेल के लैंंड लाइन का इस्तेमाल कर धमकियां देने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। गुरुग्राम जिला जेल से कथित रूप से किए गए धमकी भरे फोन कॉल के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने धमकी देने व जानलेवा हमला करने के आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश जारी किया है।
याचिका दाखिल करते हुए कृष्ण कुमार ने आर्म्स एक्ट में दर्ज एफआईआर में नियमित जमानत देने की मांग की थी। मामले में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसे जेल परिसर में लगे लैंडलाइन नंबर से लगातार धमकियां मिल रही हैं। शिकायतकर्ता ने आठ काॅल के स्क्रीनशाट भी अदालत के सामने रखे गए। जस्टिस सूर्या प्रताप सिंह ने कहा कि यदि आरोप सही हैं, तो मामला गंभीर है और इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने आदेश दिया कि इस संबंध में आदेश की प्रति महानिदेशक (जेल) को भेजी जाए और एक वरिष्ठ व जिम्मेदार अधिकारी से जांच करवाई जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
कोर्ट ने पाया कि आरोपी का व्यवहार गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की ओर इशारा करता है। सुनवाई के दौरान याची की ओर से एक हलफनामा पेश किया गया जिसमें शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर अपने आरोप वापस लिए थे। शिकायतकर्ता ने अदालत में मौजूद होकर यह स्पष्ट किया कि यह हलफनामा दबाव और धमकियों के चलते दिया गया था। शिकायतकर्ता के वकील ने भी कहा कि इस हलफनामे पर भरोसा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि हलफनामे की परिस्थितियां ही दिखाती हैं कि आरोपी गवाहों को प्रभावित करने की पूरी कोशिश कर रहा है। ऐसे में जब गवाहों के बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं आरोपी को जमानत देना न्याय में बाधा बन सकता है।