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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: कार्यपालिका के सचिव स्तर के अधिकारियों की सोच निम्न स्तर की, ये चिंताजनक

Wed, 18 Jun 2025 07:51 PM IST
चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद यदि व्यक्ति को विजिलेंस जांच में निर्दोष घोषित किया गया है, तो वह चयन के लिए उपयुक्त माना जाना चाहिए। रितु लाठर के मामले में अदालत के समक्ष रखे गए दस्तावेजों से यह प्रमाणित हुआ कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में वह कभी भी आरोपी के रूप में साबित नहीं हुईं।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) में चयन प्रक्रिया को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के सचिव स्तर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने अधिकारियों की समझ को निम्न स्तर की करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य की सर्वोच्च कार्यकारी संस्था के प्रतिनिधियों की स्थिति चिंताजनक है।
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हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा रितु लाठर की एचसीएस के लिए उम्मीदवारी को नकारने के निर्णय को न केवल मनमाना, बल्कि दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए खारिज कर दिया। 

रितु लाठर की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि 2019 में जब विकास एवं पंचायत विभाग को योग्य अधिकारियों की सूची हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) को भेजनी थी, तब विभाग ने विजिलेंस जांच का हवाला देते हुए उनका नाम शामिल नहीं किया। वहीं, दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद उनका नाम भेजा गया और वे चयनित होकर एचसीएस अधिकारी नियुक्त भी हो गए। 
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कोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद यदि व्यक्ति को विजिलेंस जांच में निर्दोष घोषित किया गया है, तो वह चयन के लिए उपयुक्त माना जाना चाहिए। रितु लाठर के मामले में अदालत के समक्ष रखे गए दस्तावेजों से यह प्रमाणित हुआ कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में वह कभी भी आरोपी के रूप में साबित नहीं हुईं। 2016 में डीएसपी स्तर की जांच में उन्हें क्लीन चिट दी गई थी और 2019 में हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो के महानिदेशक ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर यह पुष्टि की थी कि लाठर निर्दोष हैं। यह पत्र एचसीएस चयन के लिए नाम भेजने से पहले का था, फिर भी उनका नाम जानबूझकर रोका गया। कोर्ट ने हैरानी जताई कि सरकार ने अन्य दो ऐसे अधिकारियों को चयन योग्य मानना जिन पर एफआईआर तो दर्ज है, मगर कोई विजिलेंस जांच नहीं हुई, जबकि रितु लाठर को, जिन्हें विजिलेंस से क्लीन चिट मिल चुकी है, अयोग्य ठहराना यह तर्क दुर्भावनापूर्ण और पूरी तरह अनुचित है।
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