बिना धान घोटाले का जिक्र किए सीएम बोले-भ्रष्टाचार की जड़े काटने के लिए टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा
सैनी ने नवनियुक्त मार्केट कमेटी के पदाधिकारियों को किया संबोधित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में सामने आए धान घोटाले के बाद प्रदेश सरकार ने ऐसे मामलों से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने धान घोटाले का नाम लिए बिना कहा कि गेट पास जारी करने से लेकर मंडी शुल्क की वसूली तक हर प्रक्रिया को पूर्ण रूप से डिजिटल बनाना होगा ताकि कार्य में पारदर्शिता बनी रहे। भ्रष्टाचार की जड़ें काटने के लिए और अधिक टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा। सीएम सैनी सोमवार को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर बैठक के दाैरान मार्केटिंग बोर्ड के नवनियुक्त पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि किसान सेवा को पर्याय बनाते हुए प्रदेश की मंडियों को ऐसा मॉडल बनाएं जिसका अनुसरण पूरा देश करे। इसके अलावा मंडी शुल्क वसूली, व्यवहार में शत-प्रतिशत ईमानदारी बरतें और किसानों का विश्वास हासिल करें। इसके साथ ही यहां देश की सबसे आधुनिक, पारदर्शी और किसान हितैषी मंडी व्यवस्था बनाई जाए। मंडी व्यवस्था किसानों के पसीने की कमाई को सही मूल्य और सम्मान दिलाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है जिससे किसान सशक्त होगा तो हरियाणा प्रदेश सशक्त होगा। मार्केट कमेटियां सिर्फ सरकारी दफ्तर नहीं हैं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के शक्ति केंद्र हैं। इसलिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी मंडियों का उचित प्रबंधन करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्केट कमेटियों ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल क्रांति को अपनाने में सराहनीय कार्य किया है। ई-खरीद और डीबीटी को सफलतापूर्वक सुनिश्चित किया है ताकि किसान के खाते में उसकी फसल का पैसा सीधे और समय पर पहुंचे। बिचौलियों की भूमिका को खत्म कर किसानों को उनकी मेहनत का पूरा हक दिलवाया है।
पीपीपी मॉडल के तहत कोल्ड स्टोरेज स्थापित करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि फल-सब्जी उत्पादक किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था करना सरकार की प्राथमिकता है। मार्केट कमेटियों के पदाधिकारी अपने क्षेत्र में पीपीपी मॉडल के तहत कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने के प्रस्तावों को प्राथमिकता दें। मंडियों तक पहुंचने वाली सड़कों की मरम्मत और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएं ताकि किसानों को मंडियों में अपनी उपज लाने में कोई परेशानी न हो। मार्केट कमेटी के कर्मचारी किसानों के प्रति संवेदनशील हों। उन्हें नवीनतम सरकारी नीतियों, ई-पोर्टल के उपयोग और किसानों से विनम्र संवाद करने का उचित प्रशिक्षण दिया जाए। मार्केट कमेटियों में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा को अपनाना चाहिए। इससे बिजली का बिल कम होगा और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान दिया जा सकेगा। हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना समय की जरूरत है।