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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा के स्कूलों का हाल...बिजली न पानी, गर्मी-प्यास से नौनिहाल बेहाल

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स्कूलों का सच : ग्राउंड रिपोर्ट-1
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फसल कटाई से लग रहे बिजली कट, स्कूलों में पंखे चल रहे न आरओ, नल सूखे, बच्चे पसीने से तर



ग्रामीण स्कूलों में 8 से 12 घंटे बिजली कट, इनवर्टर दो घंटे में ही हो जाते हैं बंद



आरओ व वाटर कूलर चल नहीं पा रहे, जेनरेटर में डीजल के लिए फंड की कमी



अमर उजाला ब्यूरो



चंडीगढ़/हिसार/रोहतक/करनाल। 42 डिग्री तापमान व लू के बीच हरियाणा के ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों व विद्यार्थियों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकतर स्कूलों में न पंखे चल रहे हैं और न पीने के लिए साफ पानी है। नतीजा, कई जगह कक्षाओं के भीतर ही पसीने में पढ़ाया जा रहा है तो कहीं बाहर टाट पर बिठाकर। स्कूलों में यह अव्यवस्था बिजली विभाग के सप्लाई शेड्यूल के कारण आई है। गेहूूं की कटाई का सीजन होने के चलते गांवों में सुबह आठ से 12 घंटे तक कट लगने लगे हैं, जिससे स्कूलों में बिजली गुल हो जाती है। हालांकि सरकार का दावा है कि स्कूलों में जेनरेटर व इनवर्टर का बंदोबस्त किया गया है लेकिन जेनरेटर के डीजल के लिए स्कूलों के पास पैसे नहीं और इनवर्टर दो घंटे ही चल पाता है।



अमर उजाला की टीम ने 17 जिलों के कई स्कूलों में जाकर पड़ताल की तो यह एक जैसी समस्याएं सामने आईं। बच्चे भीषण गर्मी में पसीने से तर पढ़ते दिखे। कक्षाओं में पंखे तो थे पर चलता कोई-कोई मिला। कई जगह बच्चे बाहर बैठकर पढ़ते दिखाई दिए। गर्मी के कारण आधों के हाथ में पुस्तक तो कहीं आधे खेलते नजर आए। यही हाल पेयजल व्यवस्था का है। अनेक स्कूलों में पानी की टंकियां तो हैं, लेकिन आरओ सिस्टम नहीं लगा। जहां आरओ है, वहां बिजली नहीं होने के कारण वह चलता नहीं। मजबूरी में बच्चे नलों से पानी पीने को मजबूर हैं। जहां वाटर कूलर है, वहां भी गर्मी में गर्म पानी पीना पड़ता है क्योंकि लाइट नहीं होने के कारण वाटर कूलर चलते नहीं। कई स्कूलों में सोलर सिस्टम तो लगे हैं पर उनकी मरम्मत नहीं होने के कारण वे काम नहीं करते। नतीजा, पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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चरखी दादरी, फतेहाबाद व भिवानी के 580 स्कूल प्रभावित

चरखी दादरी के ग्रामीण क्षेत्र के करीब 110 स्कूल प्रभावित हैं। इन्हीं स्कूलों में पानी की भी किल्लत है। भागवी के ग्रामीणों ने स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी पर शपथपत्र भी दिए थे। अब गांव के राजकीय स्कूलों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू हो गया है। वहीं, भिवानी के 150 स्कूलों में पानी की सप्लाई भी कम हो पा रही है। टैंकरों का पानी मंगाया जा रहा है। फतेहाबाद के भी 320 स्कूलों में दिक्कत है। गांव अहरवां के राजकीय मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल की पड़ताल में सामने आया कि विद्यार्थी घर से बोतलें लेकर आ रहे हैं। फतेहाबाद के राजकीय मॉडल संस्कृति प्राइमरी विद्यालय में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं मिली। विद्यार्थी पेड़-पौधों को पानी देने के लिए लगाए गए नल से पानी पीते हुए मिले।



हिसार : एक पंखा चलाकर काम चला रहे, वह भी कितनी देर चलेगा भरोसा नहीं

हिसार में कुल 780 राजकीय स्कूल हैं। अधिकतर स्कूल ग्रामीण इलाकों में हैं। जिले में रोज लगभग 12 घंटे का कट लगता है। कटौती अधिक होने के कारण स्कूलों में लगे इनवर्टर दो घंटे में ही जवाब दे जाते हैं। शिक्षक कक्षा में एक पंखा ही चलाते हैं। इसके बावजूद तीन-चार घंटे में इनवर्टर की आपूर्ति भी बंद हो जाती है।



रोहतक में शिक्षक बोले-जनरेटर तो हैं, तेल के लिए पैसे कहां से लाएं

रोहतक के राजकीय स्कूलों में पिछले तीन दिन से फसल कटाई के कारण गांवों में बिजली नहीं आ रही है। स्कूलों में जनरेटर तो रखे गए हैं, लेकिन तेल के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इस बारे में पूछने पर शिक्षकों ने बताया कि रोज-रोज तेल डालने के लिए पैसे कहां से लाएं।



फरीदाबाद के दो स्कूलों में आरओ खराब, ठीक कराने के लिए चल रहा पत्राचार


फरीदाबाद के एनआईटी-एक स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और सरकारी मॉडल प्राथमिक विद्यालय में कई दिनों से आरओ खराब पड़ा है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय प्रशासन को कई बार इस समस्या के बारे में अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वहीं, प्राचार्य का कहना है कि आरओ मशीन खराब हो गई है। इसके लिए विभाग को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है लेकिन इसे ठीक नहीं कराया गया।



सिरसा में दिशा कमेटी की बैठक में उठ चुका मामला

सिरसा में दिशा कमेटी की बैठक में यह मामला उठ चुका है। सांसद कुमारी सैलजा ने अधिकारियों से सवाल किया था कि सरकारी स्कूलों में बिजली-पानी की क्या व्यवस्था है। इस पर अधिकारियों ने कहा कि हम इसकी जांच करवा रहे हैं। समस्या के अनुरूप समाधान करवा दिया जाएगा।




झज्जर व जींद में तो आरओ ही नहीं



झज्जर के स्कूलों में इनवर्टर व जनरेटर की सुविधा नहीं मिली। अधिकतर स्कूलों में पानी की टंकी हैं, लेकिन आरओ नहीं हैं। इस कारण बच्चों को टंकी का पानी ही पीना पड़ता है। जींद में टंकियां ही बच्चों का सहारा हैं।



सोनीपत में सोलर सिस्टम काम नहीं करते

सोनीपत में राजकीय विद्यालयों में सोलर सिस्टम सुचारू रूप से काम नहीं कर रहे। पेयजल व्यवस्था के लिए भी उचित प्रबंध नहीं हैं। एक-एक विद्यालय में करीब 500 से 700 बच्चों के लिए केवल एक आरओ सिस्टम लगा है।




रेवाड़ी में शौचालय जर्जर

रेवाड़ी में कुम्भावास स्थित राजकीय विद्यालय स्कूल परिसर में बने शौचालयों की स्थिति जर्जर अवस्था में है। स्कूल में बने शौचालय में पानी की सुविधा भी ठीक नहीं है। दरवाजे टूटे पड़े हैं।नया सत्र शुरू होने के बावजूद कोई बदलाव नहीं किया गया है।



करनाल, कुरुक्षेत्र पानीपत, यमुनानगर व कैथल में इनवर्टर कार्यालय तक सीमित

करनाल व कैथल के कई स्कूलों में इनवर्टर की व्यवस्था प्रधानाचार्य के कार्यालय तक सीमित नजर आई। आपूर्ति बाधित होने पर डिजिटल मोड से होने वाली पढ़ाई के साथ अन्य काम रुक जाते हैं। कुरुक्षेत्र व पानीपत में भी स्कूलों में लगे इनवर्टर कार्यालय तक सीमित हैं। कुरुक्षेत्र में सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में छह साल पहले दिए गए जेनरेटरों का लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा। जिन स्कूलों में संस्थाओं की मदद से वाटर कूलर लगे भी है वे भी इन दिनों बिजली न आने से शोपीस बने हुए है।
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अंबाला में हालात कुछ बेहतर

अंबाला के ज्यादातर स्कूलों में पीने के पानी के लिए आरओ भी लगाए गए हैं। हालांकि कुछ राजकीय स्कूलों में इनवर्टर की सुविधा नहीं है। इससे विद्यार्थियों को बिजली कट लगने पर दिक्कत आती है।
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