पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि पति गुजारा भत्ता राशि अर्जित करने में यदि पति सक्षम नहीं है, तो यह उसका कर्तव्य है कि वह पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण राशि देने के लिए और अधिक कमाए।
2014 में हुई थी शादी
दंपति की शादी 2014 में हुई थी और उनके विवाह से दो बच्चे पैदा हुए। पति का कहना था कि पत्नी बिना किसी कारण उससे अलग हो गई और वह करीब 5 साल से अलग रह रही है। पति ने यह भी कहा कि वह एसएमएस अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ पुरुष नर्स के रूप में काम कर रहा है और उसकी मासिक आय 57,606 रुपये है। उसने तर्क दिया कि भरण-पोषण जो उसके मासिक वेतन का लगभग आधा है, विशेष रूप से इस तथ्य को देखते हुए कि उसे अपनी बीमार मां की देखभाल भी करनी है, ठीक नहीं है। उसके पास लिए गए ऋण के संबंध में ईएमआई से संबंधित अन्य दायित्व भी हैं।
कोर्ट ने पति के अन्य दायित्व वाली दलील बीमार मां की देखभाल करने की दलील को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी तथा नाबालिग बच्चों का भरण-पोषण करना याचिकाकर्ता का न केवल कानूनी तथा वैधानिक दायित्व है, बल्कि यह सामाजिक तथा आर्थिक दायित्व भी है। कोर्ट ने कहा कि याची की पत्नी काम नहीं कर रही है तथा उसके पास दो नाबालिग बच्चे हैं, जिनकी आयु क्रमशः 8 वर्ष तथा 6 वर्ष बताई गई है। उन्होंने स्कूल जाना भी शुरू कर दिया होगा, और देश की मुद्रास्फीति के अनुपात में 24,700 रुपये प्रति माह को अधिक नहीं कहा जा सकता। परिणामस्वरूप, याचिका खारिज कर दी गई।