- प्रदेश में पहली बार तैनाती नीति-2025 लागू, भिवानी बोर्ड से ऑफलाइन परीक्षा होगी, आज से शुरू होंगे आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के सरकारी मॉडल संस्कृति (जीएमएस) और पीएमश्री स्कूलों में तैनाती के लिए शिक्षकों को टेस्ट पास करना होगा। प्रदेश में पहली बार लागू तैनाती नीति-2025 के तहत अब भिवानी बोर्ड के जरिए शिक्षकों को ऑफलाइन टेस्ट पास करने होंगे। शिक्षकों को छह जून यानी शुक्रवार से ही एमआईएस पोर्टल पर पीएमश्री व सरकारी संस्कृति मॉडल स्कूलों में जाने के लिए आवेदन करना होगा। शिक्षा विभाग द्वारा आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 13 जून 2025 की रात 10:00 बजे तक निर्धारित की गई है। इसके बाद ही किसी भी शिक्षकों के आवेदन पर विचार शुरू होगा।
पहली बार भिवानी बोर्ड से होने वाले इस टेस्ट में सभी प्राइमरी शिक्षकों को 70 फीसदी अंक लिखित परीक्षा और 30 फीसदी अंक अकादमिक के मिलेंगे। अन्य सभी श्रेणी के शिक्षकों को 60 प्रतिशत अंक लिखित परीक्क्षा 40 फीसदी अंक अकादमिक के होंगे। टेस्ट में अंक के अलावा अकादमिक में सभी श्रेणियों के टीचरों को उनकी योग्यता सर्टिफिकेट में प्राप्त अंकों के आधार पर अंक मिलेंगे।
प्रदेशभर में कुल 468 सरकारी मॉडल संस्कृति (जीएमएस) व पीएमश्री माध्यमिक उच्च विद्यालयों और 1420 सरकारी मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में खाली पदों पर तैनाती के लिए स्क्रीनिंग में पात्र और इच्छुक नियमित व अतिथि शिक्षक, परास्नातक शिक्षक, ट्रेंड स्नातक शिक्षक, क्लासिकल एंड वोकेशनल शिक्षक, प्राइमरी शिक्षक और सभी श्रेणियों के स्कूल प्रमुखों (प्रधानाचार्यों, हेड मास्टरों और हेड टीचर्स) से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
पहली बार ऑफलाइन टेस्ट, प्रक्रिया तय करना बाकी -
पहले पीएमश्री व सरकारी संस्कृति मॉडल स्कूल में तैनाती के लिए सैंटा कंपनी की तरफ से टेस्ट आयोजित कराया जाता था। इसके तहत कंपनी शिक्षकों के ऑनलाइन टेस्ट लेती थी, जिसमें सवालों को टिक करना होता था। इस कंपनी से शिक्षा विभाग का करार खत्म हो चुका है। इसके बाद पहली बार भिवानी बोर्ड से होने वाले टेस्ट को ऑफलाइन किया गया है। हालांकि, अभी तक बोर्ड ने टेस्ट प्रक्रिया को तय नहीं किया है।
10 साल तक ठहरने के मौका
इस स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए पीएमश्री और सरकारी मॉडल संस्कृति स्कूलों में तैनाती पाने वाले शिक्षकों को एक ही स्कूल में 10 साल तक ठहरने का मौका मिलेगा। पहले इन स्कूलों में तैनात की अवधि पांच साल थी।