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Chandigarh-Haryana News: कुपोषण के खिलाफ टास्क फोर्स का गठन, पोषण पंचायतें भी होंगी स्थापित

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- कार्यक्रमों व विभागों के तालमेल पर निगरानी के साथ हर 14 दिन में टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में महिलाओं व बच्चों में कुपोषण और एनीमिया से निजात दिलाने के दिशा में सरकार ने राज्य टास्क फोर्स का गठन किया है। इसकी जिम्मेदारी प्रदेशभर में कुपोषण और एनीमिया को खत्म करने के लिए चलने वाले कार्यक्रमों की निगरानी, सभी विभागों के बीच तालमेल रखने के साथ हर दो सप्ताह में समीक्षात्मक बैठक करनी है। जो सरकार को रिपोर्ट करेगी। इसके अतिरिक्त सरकार ने जमीनी स्तर पर कुपोषण से निपटने के लिए पोषण पंचायतों को स्थापित करने का भी फैसला लिया है। अमर उजाला ने 16 अप्रैल को प्रदेश में कुपोषण की समस्या से राज्य में पांच साल तक की उम्र का हर चौथा बच्चा नाटा शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था। महिला एवं बाल विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य टास्क फोर्स का गठन हुआ है। इसमें स्वास्थ्य, आयुष, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में रविवार को पोषण अभियान के तहत राज्य अभिसरण (कन्वर्जेंस) समिति की छठवीं बैठक में राज्य टास्क फोर्स और पोषण पंचायतों का एलान किया गया है।

पोषण पंचायतों में महिलाओं की उप-समितियां
महिला एवं बाल विकास व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने बताया कि जमीनी स्तर पर निगरानी के लिए पोषण पंचायतों स्थापित होगी। इनमें ग्राम पंचायतों के तहत 10-15 महिलाओं की उप-समितियां बनाई जा रही हैं। इन उप-समितियों की हर महीने बैठक होगी। ये समितियां बाल विकास सेवाओं (आईसीडीएस) की निगरानी, भोजन की गुणवत्ता का सोशल ऑडिट, आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर जांच करने के साथ स्वास्थ्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। प्रदेश में कुपोषण को कम करने के लिए ग्राम पंचायतों को सम्मानित भी किया जाएगा। वहीं, पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने प्रत्येक पंचायत द्वारा मरम्मत के लिए प्रति आंगनबाड़ी केंद्र को 25 हजार रुपये तक आवंटित करने का आश्वासन भी दिया।
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मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना के तहत फोर्टिफाइड दूध के वितरण को सटीक करने के लिए ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) शुरू की गई है। जबकि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को निर्देश दिए गए कि वह पोषण से संबंधित खामियां दूर करने के लिए राज्य में बिकने वाले चावल, गेहूं और सरसों के तेल को फोर्टिफाइड करना तय कराए।
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प्रदेश में पोषण पर सुधार का दावा
सुधीर राजपाल ने बताया कि प्रदेश में कुपोषण से निपटने की दिशा में सरकार के प्रयास रंग दिखाने लगे हैं। कम वजन वाले बच्चों का अनुपात 29.4 फीसदी से घटकर 21.5 फीसदी रह गया है, इसी तरह बौनापन 34 फीसदी से घटकर 27.5 रह गया है।
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