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Chandigarh-Haryana News: पराली जलाने वालों पर सख्ती हुई तो 9 वर्षों की तुलना में 85 प्रतिशत तक घटे मामले, इस बार भी पंचायतों को मिलेगी प्रोत्साहन राशि

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- हरियाणा में 2015 में 15,686 आग जलाने के सामने आए थे मामले, 2024 में 1406 केस
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- रेड से ग्रीन जोन में शामिल पंचायतों को एक लाख, यलो से ग्रीन में आने वाली पंचायतों को मिलेंगे 50 हजार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में पराली जलाने वाले किसानों पर इस बार भी शिकंजा कसने की तैयारी है। पिछले वर्ष किसानों की रेड एंट्री शुरू की गई थी। इस बार और सख्ती होगी। पिछले वर्ष सख्ती का असर यह रहा कि 9 वर्षों की तुलना में 2024 में एक्टिव फायर लोकेशन(एएफएल) के मामलों में 85 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई थी। इस बार विभाग का जोर है कि मामले बेहद कम हों। वहीं, पिछले वर्षों की तरह ही इस बार रेड से ग्रीन श्रेणी में आने वाली पंचायतों को 1-1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यलो से ग्रीन श्रेणी में आने वाली पंचायतों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सरकार देगी।
हरियाणा कृषि एवं कल्याण विभाग ने सरकार के आदेश पर पराली जलाने वालों की निगरानी के कार्य में लापरवाही बरतने वातों पर भी कार्रवाई की थी। इसका असर यह हुआ कि पिछले वर्ष पराली जलाने के केवल 1406 मामले चिह्नित किए गए। 35 अधिकारी-कर्मचारी चार्जशीट और 28 कर्मचारी निलंबित भी किए गए थे। पिछली वर्ष 1218 किसानों की रेड एंट्री हुई। इसके तहत ऐसे किसानों को चार फसलों या अगले दो वर्ष तक किसी भी सरकारी सुविधा या योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2021 से 2024 तक पराली जलाने वाले किसानों पर स्थानीय प्रशासन की तरफ से 858 एफआईआर दर्ज कराईं गईं। 8687 चालान भी किए गए।
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पंचायतों से भी सामूहिक रूप से मांगा सहयोग
कृषि कल्याण विभाग ने पराली जलाने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के साथ ही पंचायतों से भी सहयोग मांगा है। विभाग के अनुसार, जिन पंचायतों में पराली जलाने के 5 से अधिक मामले चिह्नित हो जाते हैं उन्हें रेड श्रेणी में माना जाता है। इसी तरह से 1 से 5 तक पराली जलने के मामले चिह्नित होने वाली पंचायतों को यलो श्रेणी में शामिल किया जाता है। जहां कोई केस नहीं मिलता उन्हें ग्रीन श्रेणी में रखा जाता है। पिछली बार ग्रीन श्रेणी में 6000 पंचायतें शामिल थीं। इस बार 85 लाख मीट्रिक टन पराली के उत्पादन का आकलन विभाग ने किया है। दरअसल, इस बार 41 लाख एकड़ क्षेत्रफल में धान की रोपाई का पंजीकरण हुआ है।
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पिछले सालों में पराली जलाने वालों पर की गई कार्रवाई
वर्ष
केस जुर्माना(लाख रुपये)

2016
15686
19.38

2017
13085
42.17

2018
9225
50.05

2019
6364
19.20

2020
4202
86.46

2021
6987
80.12

2022
3661
61.90

2023
2303
46.90

2024
1406
16.27

स्रोत : कृषि एवं कल्याण विभाग।

किसानों को गांव-गांव पहुंचकर हमारी टीमें पराली प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करके सरकारी योजनाएं बता रही हैं। फिर भी किसान नहीं समझेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
पंकज अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा कृषि एवं कल्याण विभाग ।
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