फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh-Haryana News: पंजाब-हिमाचल से ज्यादा जवां है हरियाणा, बुजुर्गों की आबादी राष्ट्रीय औसत से कम

विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा में सिर्फ 8.3 फीसदी है बुजुर्गों की आबादी, 15 साल से कम उम्र के बच्चों की आबादी भी अधिक है
विज्ञापन


पंजाब की 11.2 और हिमाचल प्रदेश की 13.2 फीसदी आबादी बुजुर्गों की है



आशीष वर्मा
चंडीगढ़। पड़ोसी राज्य पंजाब और हिमाचल के मुकाबले हरियाणा में बुजुर्गों की आबादी कम है। इन दोनों राज्यों में तेजी से वृद्ध आबादी बढ़ रही है जबकि हरियाणा में इसकी गति राष्ट्रीय औसत से भी कम है। हरियाणा में युवा जनसंख्या ज्यादा है। गृह मंत्रालय की नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) की रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश की 13.2 फीसदी व पंजाब की 11.6 फीसदी आबादी 60 साल से अधिक उम्र वालों की है। हरियाणा की कुल जनसंख्या में सिर्फ 8.5 फीसदी आबादी 60 साल से अधिक ऊपर की है, जो राष्ट्रीय औसत 9.7 फीसदी से भी कम है।
रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा के बुजुर्गों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या अधिक है। इनमें 8.9 फीसदी महिलाएं हैं और 8.1 प्रतिशत पुरुष हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों की तुलना की जाए तो गांवों में बुजुर्गों की संख्या अधिक है। गांवों में बुजुर्गों की संख्या 8.5 फीसदी है और शहरों में 8.4 फीसदी आबादी बुजुर्गों की है।
विज्ञापन

पड़ोसी राज्यों में भी यही पैटर्न दिखता है। हिमाचल व पंजाब में भी वृद्ध महिलाएं अधिक संख्या में हैं। हिमाचल में 14 फीसदी और पंजाब में 12.1 फीसदी महिलाएं वृद्ध हैं। केरल में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग की जनसंख्या का प्रतिशत देश में सबसे अधिक है। जहां कुल जनसंख्या में से 15.1 फीसदी आबादी बुजुर्गों की है। उसके बाद तमिलनाडु (14%) और हिमाचल प्रदेश (13.2%) का स्थान है। दूसरी ओर झारखंड (7.6%), असम (7.6%) और दिल्ली (7.7%) में बुजुर्गों की जनसंख्या का प्रतिशत सबसे कम है।


राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है 15 साल से कम बच्चों की आबादी

रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में 14 साल तक के लोगों की आबादी 24.5 फीसदी है। राष्ट्रीय औसत 24.2 फीसदी है। पंजाब में 19.3 फीसदी और हिमाचल प्रदेश में 20.4 फीसदी आबादी 14 सात तक के लोगों की है। हरियाणा में 15-49 साल के लोगों की आबादी भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। हरियाणा में इन लोगों की आबादी 67.1 फीसदी है जबकि राष्ट्रीय औसत 66.1 फीसदी है।

तरक्की के रास्ते खोलते हैं युवा

पंजाब विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग के चेयरपर्सन प्रोफेसर विनोद चौधरी ने बताया कि 15 से 49 साल के वर्ग को वर्कफोर्स के तौर पर जाना जाता है। इनका राज्य की अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा योगदान रहता है। जिन देशों में युवाओं की संख्या ज्यादा होगी तो वहां उद्योग धंधे मजबूत होंगे। कारोबार बढ़ेगा। खेल और खेती में तरक्की दिखती है। ये आबादी पैसा भी ज्यादा खर्च करती है। ज्यादा खर्च से मांग उत्पन्न होती है और बाजार में पैसा आता है। कुछ मिलाकर इससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। वहीं, जहां बुजुर्ग आबादी ज्यादा होगी, वहां आर्थिक गतिविधियां और सरकारी संस्थानों की क्षमता कम होने लगती है। कुल मिलाकर जितनी युवा आबादी होगी राज्य व देश उतना तरक्की करेगा।




युवा आबादी का असर


सेना :
हरियाणा के लोगों की भारतीय सेनाओं में अहम भागीदारी है। सेना में हरियाणा का योगदान राष्ट्रीय जनसंख्या में राज्य के हिस्से से कहीं अधिक है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक सेना के विभिन्न रैंकों में हरियाणा के लोगों का 5़7 फीसदी हिस्सा है जबकि देश की कुल जनसंख्या में राज्य का हिस्सा सिर्फ 29 फीसदी है।


खेल : हरियाणा की युवा आबादी का सबसे ज्यादा असर खेलों में दिखता है। ओलंपिक खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों का डंका बजता रहा है। पिछले साल पेरिस ओलंपिक में कुल छह में से चार मेडल हरियाणा के खिलाड़ियों ने हासिल किए थे। पिछले 25 सालों का आंकड़ा देखें तो देश ने कुल 26 पदक जीते, जिनमें से 15 हरियाणा के थे।
विज्ञापन




सिविल सर्विसेज :
इसी साल सिविल सेवा के परिणाम में हरियाणा के 64 युवाओं ने सफलता हासिल की। यह पहला मौका था, जब इतनी बड़ी संख्या में युवाओं ने सिविल सेवा परीक्षा पास की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें