ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने दिया लक्ष्य
सभी राज्यों को लाइन लॉस 16 फीसदी तक करने के लिए भी कहा
चंडीगढ़। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि उत्तर भारत के सभी राज्यों को अपने सरकारी भवन, कार्यालय व आवासीय कॉलोनियों में अगस्त 2025 तक प्री पेड मीटर लगाने का लक्ष्य दिया गया है। इसके बाद व्यावसायिक व बड़े लोड वाले उपभोक्ताओं के प्रीपेड मीटर लगवाए जाएंगे। प्रीपेड मीटर लगाने पर बिल में दो से पांच प्रतिशत की प्रति महीना रियायत दी जाएगी। हरियाणा में पांच प्रतिशत रियायत दी जाती है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल शुक्रवार को चंडीगढ़ में आयोजित उत्तरी राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सभी मंत्रियों से प्री पेड मीटर की शुरुआत अपने घरों से करने के लिए कहा है। हरियाणा में अब तक करीब पांच लाख प्री पेड मीटर लगाए जा चुके हैं।
चंडीगढ़ में आयोजित ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों के मंत्रियों व अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन कैपेसिटी, ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और संसाधनों को बढ़ाने समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने बताया छह घंटे चली लंबी बैठक में संचरण क्षमता को बढ़ाने के साथ लाइन लॉस को घटाने पर चर्चा हुई। राज्य के सभी ऊर्जा मंत्रियों को लाइन लॉस कम करने का लक्ष्य दिया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर लाइन लॉस का औसत 16 प्रतिशत है, जबकि कई राज्यों में यह औसत 17 से 20 प्रतिशत है। स्मार्ट मीटर से लाइन लॉस कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के विजन विकसित भारत-2047 को देखते हुए विद्युत मंत्रालय ने पावर फॉर ऑल-फॉर ऑल टाइम के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं। किसानों के प्री-पेड मीटर के विरोध पर उन्होंने कहा कि किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्हें बिजली मुफ्त मिलती है। सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। उन्होंने कहा कि भारत अभी कई देशों को बिजली सप्लाई करता है। हाल ही में यूएई भारत के बीच बिजली सप्लाई का समझौता हुआ है। समुद्र के अंदर से केबिल डाली जाएगी।
बिजली की मांग 260 गीगावाट तक पहुंची
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने बताया कि गर्मियों के सीजन में बिजली की डिमांड पीक पर होती है। पिछले साल पीक सीजन में मांग 250 गीगावाट थी, जो इस बार बढ़कर 260 गीगावाट के ऊपर पहुंच गई है। हालांकि जितनी डिमांड है, उतनी बिजली उपलब्ध है। सम्मेलन के दौरान इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। वहीं निवेश बढ़ाने को लेकर भी सभी राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के साथ मंत्रणा की गई। केंद्र सरकार की ओर से डेढ़ लाख करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है, जिसे राज्य 50 साल की लंबी अवधि के लिए बिना ब्याज के ले सकते हैं।
सभी राज्य बनाएं ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने ऊर्जा मंत्रियों से कहा कि वह अपने राज्यों में ग्रीन एनर्जी कोरिडोर बनाएं। इससे रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन बढ़ेगा। 2014 में रिन्यूएबल एनर्जी का शेयर 32 प्रतिशत था जो अब बढ़कर 45 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है। वहीं उद्योगों में भी ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा दिया जा रहा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कुछ प्रतिबंध लगाए जाने हैं। उद्योगों को ग्रीन एनर्जी उत्पादन करने का लक्ष्य दिया गया है।