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Chandigarh-Haryana News: सरकारी आवास योजनाओं के लाभार्थियों के लिए प्लॉट की रजिस्ट्री पर स्टांप शुल्क समाप्त

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ग्रामीण क्षेत्र में 100 गज व शहरी में 50 गज के रिहायशी प्लॉट देती है सरकार
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मानसून सत्र के आखिरी दिन सदन में मुख्यमंत्री ने की घोषणा

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की सरकारी आवास योजनाओं के लाभार्थियों को प्रदेश सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 100 गज और शहरी क्षेत्रों में 50 गज तक के रिहायशी प्लॉट की रजिस्ट्री कराने पर स्टांप शुल्क समाप्त कर दिया है। यह घोषणा बुधवार को मानसून सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की। मानसून सत्र में 4 बैठकें हुईं। इसमें छह विधेयक और गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी वर्ष पर कार्यक्रम का प्रस्ताव पारित हुआ।
इनेलो विधायक अदित्य देवीलाल व अर्जुन चौटाला के कलेक्टर रेट में वृद्धि पर लगे ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना, मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत शहरों में 50 गज और ग्रामीण क्षेत्र में 100 गज तक के रिहायशी प्लॉट की रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इससे प्रदेश के गरीब परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
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सीएम के बोले शब्द पर कांग्रेस ने किया हंगामा, कार्यवाही से हटा
स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री की शायरी में था शब्द

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन भी सत्ता पक्ष और कांग्रेस के विधायकों के बीच खूब हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के बाद कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से मंगलवार को बोले गए एक शब्द पर उखड़ गए। उन्होंने कहा, यह शब्द किसके लिए बोला गया है यह सीएम को स्पष्ट करना चाहिए। विवाद इतना बढ़ा कि कांग्रेस विधायक वेल तक पहुंच गए। विधानसभा अध्यक्ष को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा मगर कांग्रेस विधायक अपनी मांग पर अड़े। विपक्ष के तेवर देख सत्ता पक्ष के विधायक भी नारेबाजी करने लगे। बाद में स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने कहा जिस शब्द पर आपत्ति जताई गई है उसे हटा दिया गया है।
बुधवार को प्रश्नकाल खत्म होते ही कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल, विकास सहारण, जस्सी पेटवाड़ व इंदु नरवाल विधानसभा अध्यक्ष से बोलने की इजाजत मांगी, मगर अध्यक्ष ने उन्हें अनसुना कर दिया। इस पर कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए वेल तक पहुंच गए। तब तक न मुख्यमंत्री को पता था और न अध्यक्ष को जानकारी थी कि विपक्ष के विधायक क्यों नारेबाजी कर रहे हैं। हरविंद्र कल्याण ने विपक्ष के सदस्यों से कहा कि जब तक वे अपनी सीट पर नहीं बैठेंगे, तब तक वे बात नहीं सुनेंगे। विधायक जब बैठे तो कल्याण ने गीता भुक्कल को अपनी बात रखने के लिए कहा। भुक्कल ने कहा, मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सदन में एक आपत्तिजनक शब्द बोला है। यह किसके लिए बोला गया।


हुड्डा बोले- मुझे गाली देने से संतुष्टि मिलती है तो पांच छह गाली और दे दो

विवाद के दौरान पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सीएम से कहा कि यदि आपको मुझे गाली देने से संतुष्टि मिलती है तो आप मुझे पांच-छह और गाली दे दो। पूर्व सीएम ने सैनी के कहे शब्दों को दोहराया तो सीएम सैनी ने कहा कि आप गलत कह रहे हैं। हुड्डा ने कहा, आपने जो शब्द कहे हैं उसे आप वापस ले लो, मैं अपने शब्द वापस ले लेता हूं। विधायक रघुवीर कादियान ने अध्यक्ष से कहा कि काफी देर से सदन में टकराव की स्थिति है। ये इसलिए है क्योंकि मुख्यमंत्री की जवाबदेही है। विपक्ष का फर्ज है कि वह मुद्दे उठाए। कांग्रेस स्थगन प्रस्ताव लाई और आपने चर्चा भी कराई। हमने कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाया और हमें आपत्तिजनक शब्द कहा जा रहा है। इस शब्द को या तो सीएम वापस लें या आप सदन की कार्यवाही से ये निकाल दें।


विज बोले- भगोड़ों के अधिकार छीन लिए जाते हैं


विवाद के दौरान कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा, ठीक है विपक्ष को बोलने का अधिकार है लेकिन उसे सुनने का भी माद्दा रखना चाहिए। इतिहास गवाह है कि भगोड़ों के अधिकार छीन लिए जाते हैं। आप सुनते नहीं हैं भाग जाते हैं। कार्यवाही से तो ये शब्द हटा दिया जाएगा मगर लोगों के जहन में जो शब्द है,उसे कैसे हटाओगे। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि इनका विपक्ष का नेता नहीं है। इसलिए ये भटक जाते हैं और भाग जाते हैं।

सीएम बोले- जो मैंने कहा- वह एक नाम है

हंगामे के दौरान सीएम ने सफाई दी कि मैंने जो कहा था वह एक नाम था। उन्होंने सरहद पर रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर कर दी थी। विपक्ष को उनके नाम पर क्या आपत्ति होनी चाहिए। विपक्ष के लोग इसको अपमानित कर रहे हैं। इस पर कांग्रेस विधायक फिर से नाराज हो गए और नारेबाजी की। बहस के दौरान सीएम ने कहा, हुड्डा जी मेरे सम्मानित हैं। ये पीढ़ियों से यहां पर हैं। दो बार मुख्यमंत्री रहे। मैंने स्पीकर साहब से कहा है कि यदि मेरे किसी शब्द से ठेस पहुंच रही है तो उसे हटा दिया जाए।
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वोट चोरी पर सीएम का पलटवार, कहा- कांग्रेस का इतिहास फर्जीवाड़े का

मानसून सत्र समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस के सदन के अंदर व बाहर वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कथित फर्जी वोटिंग को लेकर हल्ला मचा रही है जबकि यही दल अपने पूरे राजनीतिक इतिहास में फर्जीवाड़े, भ्रष्टाचार और लोकतंत्र की हत्या के लिए जिम्मेदार है। 1946 में कांग्रेस के आंतरिक चुनाव में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को 14 वोट और पंडित जवाहर लाल नेहरू को केवल एक वोट मिला था। फिर भी नेहरू जी को विजेता घोषित कर दिया गया। यही असली बूथ कैप्चरिंग थी। 2009 विधानसभा चुनाव में सुखबीर कटारिया से जुड़ा बोगस वोटिंग का मामला सबको पता है। उन पर मतदाता सूची में हेरफेर करने करने का आरोप लगा था। दो एफआईआर भी दर्ज हुई थीं। हरियाणा की जनता जानती है कि कांग्रेस सरकार के समय बूथ कैप्चरिंग, दबाव, शराब और पैसे बांटकर वोट खरीदना आम बात हुआ करती थी। इसी कांग्रेस के समय लिंगानुपात 871 था और प्रदेश पर कन्या भ्रूण हत्या का कलंक था। हमारी सरकार ने इस कलंक को धोया है।
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