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Chandigarh-Haryana News: अपराध के प्रति गंभीर व निर्विवाद छवि की वजह से सिंघल बने सरकार की पसंद

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किसी खेमे से जुड़े नहीं थे, मित्तल से वरिष्ठता भी उनके पक्ष में गई
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चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस के नए मुखिया अजय सिंघल की अपराध के प्रति गंभीर व निर्विवाद छवि रही है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे किसी खेमे से जुड़े नहीं रहे हैं। जब राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का पद संभाला तो उन्होंने भ्रष्टाचारियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान छेड़ा, जो काफी चर्चा में रहा। यही वजह है कि वे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पहली पसंद बने और राज्य सरकार ने उन्हें डीजीपी के पद पर काबिज किया।
संघ लोकसेवा आयोग ने जो पैनल हरियाणा सरकार को भेजा था उसमें सबसे ऊपर शत्रुजीत कपूर का नाम था। हालांकि उनके कार्यकाल के सिर्फ दस महीने ही बचे थे और वाई पूरण कुमार आत्महत्या प्रकरण के बाद सरकार उन्हें दोबारा इस पद पर नहीं लाना चाहती थी। दूसरे नंबर पर अजय सिंघल और तीसरे नंबर आलोक मित्तल का नाम था। सिंघल के पक्ष में एक बात जो गई है वह उनकी वरिष्ठता थी। वे आलोक मित्तल से एक साल वरिष्ठ हैं। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी उनके नाम पर कोई आपत्ति नहीं थी। बताया जा रहा था कि पिछले दिनों जब अमित शाह पंचकूला दौरे पर आए थे तभी सिंघल के नाम पर मुहर लग गई थी।
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रेवाड़ी के रहने वाले सिंघल आईआईटी दिल्ली से पढ़े हैं


1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय सिंघल मूलरूप से रेवाड़ी से हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की है। अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, विजिलेंस, रेलवे पुलिस, सीआईडी, स्पेशल ब्रांच, साइबर अपराध व आंतरिक सुरक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। उन्हें 2008 में पुलिस पदक व 2017 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं हैं। तब आर्थिक अपराधों, तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में उनके कार्य को विशेष रूप से सराहा गया था।


अपराध नियंत्रण के लिए योजना तैयार, जल्द साझा करूंगा : सिंघल

डीजीपी अजय सिंघल ने कहा, उन्हें राज्य सरकार ने जो जिम्मेदारी दी है उसे वह पूरी जी जान से निभाएंगे। महत्वपूर्ण दायित्व के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, अपराध नियंत्रण के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर योजना तैयार की है। जल्द ही उसे साझा किया जाएगा। आधुनिक तकनीक, बेहतर समन्वय, पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण के माध्यम से पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा ताकि आम नागरिक का विश्वास पुलिस व्यवस्था में और मजबूत हो सके।
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मित्तल के पास अब भी मौका, चावला हो जाएंगे रिटायर

डीजीपी पद से भले ही आलोक मित्तल चूक गए हों मगर अब भी उनके पास एक मौका है। दरअसल उनका रिटायरमेंट 2029 में है। यदि सरकार चाहेगी तो सिंघल के के बाद उन्हें डीजीपी बना सकती है। वहीं, एएस चावला फिलहाल अब डीजीपी नहीं बन सकेंगे। उनका रिटायरमेंट 2027 में है। उधर, सरकार जल्द ही एसीबी, डीजी जेल और डीजी होमगार्ड के पदों पर भी जल्द नई नियुक्तियां करेगी।
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