लोकसभा अध्यक्ष ने हरियाणा विधानसभा द्वारा आयोजित विधायी प्रशिक्षण कार्यशाला का किया उद्घाटन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा की ओर से विधायी प्रारूपण व क्षमता संवर्धन विषय पर शुक्रवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ चंडीगढ़ स्थित महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान में किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शामिल हुए। उन्होंने कहा कि विधायी ड्राफ्टिंग लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा है। स्पष्ट, सरल और पारदर्शी कानून ही लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं। समय के साथ बदलती परिस्थितियों के अनुरूप कानूनों में संशोधन और नए कानूनों का निर्माण आवश्यक है। कोशिश है कि बेहतर प्रशिक्षण से आने वाले समय में ऐसे विधायी मसौदे तैयार कर सकें जो नागरिकों के कल्याण और राज्य के विकास के लिए अधिक प्रभावी साबित हों।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की धरती लोकतांत्रिक मूल्यों की सदैव प्रहरी रही है। राज्य ने आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर देशभर में अपनी विशेष पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों की सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदकर एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। कहा कि कभी ऐसा समय था जब विधायी विभागों में अनुभवी विशेषज्ञ बड़ी संख्या में कार्यरत थे। मगर समय के साथ वे सेवानिवृत्त होते गए और धीरे-धीरे विधायी मसौदा तैयार करने वाले विशेषज्ञों की कमी महसूस होने लगी। पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह अनुभव किया कि विधायी ड्राफ्टिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य की विधानसभाएं और राज्य सरकारें नियमित रूप से विधायी ड्राफ्टिंग से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रारूपण में पारदर्शिता, स्पष्टता और सरलता हो तो कानून आम नागरिक के लिए उपयोगी और न्यायोचित बनता है।
विधायी ड्राफ्टिंग में आधुनिकता व नवाचार की जरूरत : सैनी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विधायी ड्राफ्टिंग केवल तकनीकी अभ्यास नहीं बल्कि लोकतंत्र को अधिक सशक्त, प्रभावी और जनता के करीब लाने का एक माध्यम है। अच्छे और स्पष्ट कानून ही किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था की असली ताकत होते हैं। साथ ही यह भी आवश्यक है कि ड्राफ्ट बनाते समय भविष्य की चुनौतियों और तकनीकी बदलावों का ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि विधायी ड्राफ्टिंग में भी आधुनिकता और नवाचार की जरूरत है। इसके लिए एआई का इस्तेमाल भी किया जाना चाहिए। हमारी विधानसभा ने समय-समय पर अपने कामकाज की पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए नए कदम उठाए हैं। ई-विधान, डिजिटलीकरण और पारदर्शिता की दिशा में हरियाणा विधानसभा देश की अग्रणी विधानसभाओं में गिनी जाती है। अब विधायी ड्राफ्टिंग पर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अधिकारियों से कहा कि वे इस प्रशिक्षण को केवल एक ट्रेनिंग प्रक्रिया न मानें बल्कि इसे एक जनसेवा का अवसर मानें। हरियाणा सरकार का लक्ष्य एक ऐसा शासन मॉडल स्थापित करना है जो पारदर्शी, जवाबदेह और कुशल हो।
विधायी ड्राफ्टिंग महत्वपूर्ण विषय : कल्याण
हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कहा कि विधायी ड्राफ्टिंग एक महत्वपूर्ण विषय है। इसका अर्थ है नीति को औपचारिक और कानूनी भाषा में बदलना ताकि वे साफ, सटीक और सबको समझ में आने योग्य कानून के रूप में सामने आ सके। विधायी ड्राफ्टिंग में भाषा ऐसी हो कि कोई भी नागरिक पढ़कर साफ-साफ समझ सकें कि उसमें क्या लिखा है। शब्दों का चयन ऐसा हो कि एक ही बात के दो अलग-अलग अर्थ न निकले। पूरा कानून एक समान नियम और शैली में तैयार किया जाए। उन्होंने कहा पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस लक्ष्य की प्राप्ति में लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की एक बहुत बड़ी भूमिका है।