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झटका : प्रदेश के दोनों बिजली वितरण निगमों की रेटिंग गिरी

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- देश की सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की 14वीं वार्षिक एकीकृत रेटिंग रिपोर्ट जारी
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- यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन की रेटिंग ए प्लस श्रेणी से गिरकर ए श्रेणी में पहुंची


अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। देश की सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की 14वीं वार्षिक एकीकृत रेटिंग रिपोर्ट में हरियाणा के दोनों प्रमुख बिजली वितरण निगमों उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) की रेटिंग में गिरावट आई है। इससे प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह रिपोर्ट पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के मार्गदर्शन में तैयार की जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार यूएचबीवीएन को इस बार 66.32 अंक के साथ ए श्रेणी दी गई है जबकि पिछली बार 13वीं रेटिंग में निगम को 92.83 अंक के साथ ए प्लस श्रेणी मिली थी। एक ही वर्ष में लगभग 26 अंकों की गिरावट यह दर्शाती है कि निगम की कार्यप्रणाली में काफी कमजोर हुई है। वहीं यूएचबीवीएन के तहत आने वाले शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में आए दिन बिजली कटौती, फॉल्ट ठीक करने में देरी और उपभोक्ता शिकायतों के समाधान में लापरवाही को लेकर पहले से ही नाराजगी बनी हुई है। अब रेटिंग रिपोर्ट ने इन शिकायतों पर आधिकारिक मुहर लगा दी है।
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इसी तरह डीएचबीवीएन को 74.44 अंक के साथ ए श्रेणी मिली है जबकि पिछली रेटिंग में निगम को 87.59 अंक के साथ ए प्लस श्रेणी प्राप्त हुई थी। रिपोर्ट बताती है कि निगम का प्रदर्शन लगभग सभी प्रमुख मानकों पर पिछड़ा है। डीएचबीवीएन के सामने लाइन लॉस पर नियंत्रण, कमजोर बिल वसूली, बढ़ता घाटा और उपभोक्ता सेवाओं में कमी जैसी गंभीर चुनौतियां हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बिजली कटौती और स्मार्ट मीटर जैसे प्रोजेक्ट्स की धीमी रफ्तार भी निगम की रेटिंग गिरने के कारणों में शामिल मानी जा रही है।

उधर, पड़ोसी राज्यों से तुलना करें तो पंजाब की बिजली वितरण कंपनी को 89.22 अंक के साथ ए प्लस श्रेणी मिली है जबकि हिमाचल प्रदेश को 53.69 अंक के साथ बी श्रेणी प्राप्त हुई है। राजस्थान की अधिकांश बिजली कंपनियां भी बी या बी माइनस श्रेणी में हैं। हरियाणा के दोनों बिजली निगमों का पिछड़ना सरकार और ऊर्जा विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है।
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रिपोर्ट के मुताबिक अगर समय रहते पारदर्शी बिलिंग, लाइन लॉस में कमी और उपभोक्ता सुविधाओं में सुधार पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हरियाणा की बिजली वितरण व्यस्था और कमजोर हो सकती है। यह रिपोर्ट सरकार के लिए स्पष्ट चेतावनी मानी जा रही है।
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