हरियाणा में जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियां तेज हो गई हैं। मकानों की गणना पूरी होने के बाद अब लोगों की गिनती का काम शुरू किया जा रहा है। इसकी शुरुआत सोमवार से प्री-टेस्ट के साथ होगी।
हरियाणा में इसके लिए पंचकूला और फरीदाबाद जिलों का चयन किया गया है। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होगी। साल 1931 के बाद पहली बार लोगों से उनकी जाति और डिजिटल साक्षरता से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। डिजिटल साक्षरता के तहत यह जानकारी ली जाएगी कि व्यक्ति को कंप्यूटर चलाना आता है या नहीं, ई-मेल लिखना आता है या नहीं और वह स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर सकता है या नहीं।
इस प्री-टेस्ट का मकसद यह जानना है कि एक व्यक्ति की पूरी जानकारी दर्ज करने में कितना समय लगता है, ताकि वास्तविक जनगणना के दौरान कर्मचारियों की संख्या और ड्यूटी उसी हिसाब से तय की जा सके। जनगणना का दूसरा चरण अगले साल फरवरी या मार्च में शुरू हो सकता है। जनगणना विभाग ने प्री-टेस्ट के लिए 42 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देकर उनकी ड्यूटी लगाई है। इन शिक्षकों को मेहनताना के रूप में 10-10 हजार रुपये भी दिए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्री-टेस्ट से मिलने वाले अनुभव के आधार पर अंतिम जनगणना की पूरी योजना तैयार की जाएगी। दो महीने पहले मई में मकानों की गणना के दौरान 34 सवाल पूछे गए थे।
इस बार 40 सवाल पूछे जाएंगे
दूसरे चरण में लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार, शिक्षा, भाषा, धर्म, जाति और बच्चों से जुड़ी जानकारी भी शामिल होगी। लोगों से पूछा जाएगा कि उनकी मातृभाषा क्या है, वे कितनी भाषाएं बोल, पढ़ और लिख सकते हैं। इसके अलावा परिवार में बच्चों की संख्या, पहले किसी बच्चे की मृत्यु हुई है या नहीं, सामान्य वर्ग या अन्य जाति व धर्म से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। हरियाणा के अलावा चंडीगढ़, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम, मेघालय, सिक्किम, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार में भी जनगणना के दूसरे चरण का प्री-टेस्ट किया जाएगा।
मकान विहीन लोगों की भी होगी गिनती
इस बार जनगणना में ऐसे लोगों को भी शामिल किया जाएगा जिनके पास रहने के लिए स्थायी मकान नहीं है। पाइपों में रहने वाले, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रात बिताने वाले लोगों की भी गिनती की जाएगी। जनगणना के अंतिम दिन विशेष टीमें रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और एयरपोर्ट पर तैनात रहेंगी, ताकि वहां मौजूद लोगों का भी रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।
पार्षदों व ग्राम पंचायत सदस्यों की ली जाएगी मदद
राज्य के प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. ललित जैन ने बताया कि कई बार लोग जनगणनाकर्मियों को जानकारी देने में सहयोग नहीं करते। ऐसे मामलों में जरूरत पड़ने पर संबंधित क्षेत्र के पार्षदों और ग्राम पंचायत सदस्यों की मदद ली जाएगी। उन्होंने कहा कि जनगणना कानून के तहत सही जानकारी देना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। गलत जानकारी या जानकारी देने से इंकार करना कानूनन अपराध है। इसलिए सभी लोगों से अपील है कि वे जनगणना टीम का पूरा सहयोग करें, ताकि सही और विश्वसनीय आंकड़े तैयार किए जा सकें।