चंडीगढ़। कुरुक्षेत्र में बनने वाले ‘सिख संग्रहालय व विरासत केंद्र’ और ‘संत रविदास भवन व संग्रहालय’ के लिए शोध समितियों को गठित किया जाएगा। यह समितियां पवित्र गुरुओं की जीवन यात्रा, शिक्षाओं और आदर्शों से संबंधित विषय-वस्तु का परीक्षण व सत्यापन करेंगी ताकि दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के कार्य को शीघ्र गति मिल सके।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिख संग्रहालय व विरासत केंद्र और संत रविदास भवन व संग्रहालय की प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि समितियों में ऐसे विद्वान सम्मिलित किए जाएंगे जिन्होंने गुरुओं के जीवन व योगदान पर गहन अध्ययन और शोध कार्य किया हो। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने दोनों संग्रहालयों के संकल्पना डिजाइनों की भी समीक्षा की और अधिकारियों को कम से कम 4-5 विकल्प प्रस्तुत करने को कहा।
कुरुक्षेत्र में बनने वाले सिख संग्रहालय में सिख इतिहास, संस्कृति और गुरुओं की यात्रा को विस्तार से प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आदेश दिए हैं कि संग्रहालयों के लिए वास्तुशिल्पीय डिजाइन तैयार करते समय संरचनाओं की एकरूपता सुनिश्चित की जाए। भवन चारों ओर से समान रूप से प्रभावशाली और आकर्षक दिखाई दें।
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया है कि सिख गुरुओं के इतिहास और शिक्षाओं के साथ-साथ संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के जीवन व विचारों पर आधारित पुस्तकों की तैयारी अभी से प्रारंभ कर दी जाए ताकि संग्रहालयों के उद्घाटन अवसर पर उनका विमोचन किया जा सके। हरियाणा सरकार कुरुक्षेत्र में तीन एकड़ भूमि पर सिख संग्रहालय व विरासत केंद्र और पांच एकड़ भूमि पर गुरु रविदास भवन व संग्रहालय की स्थापना कर रही है।
बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, पर्यटन व विरासत विभाग की प्रधान सचिव कला रामचंद्रन, महानिदेशक (सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा) के. मकरंद पांडुरंग, मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी भारत भूषण भारती, विशेष कार्याधिकारी डॉ. प्रभलीन सिंह, हरियाणा साहित्य व संस्कृत अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री आदि शामिल रहे।