-हाईकोर्ट ने माफी और रामपाल की उम्र को देखते हुए दी राहत
-भविष्य में किसी अवमानना पूर्ण कृत्य पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आपराधिक अवमानना की कार्रवाई का सामना कर रहे कथित संत रामपाल की माफी और उनकी उम्र को आधार बनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें क्षमा दान दिया है। कोर्ट ने रामपाल के खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना याचिका का निपटारा कर दिया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में रामपाल के हलफनामे की सामग्री को देखते हुए कहा कि उनकी उम्र (75 वर्ष) और 2014 से लगातार कारावास को ध्यान में रखते हुए यह मामला समाप्त किया जा रहा है। साथ ही, खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि रामपाल या उनके अनुयायी किसी भी प्रकार का ऐसा कार्य करते हैं जिसे अदालत की अवमानना माना जा सके, तो उस पर गंभीर दृष्टि से विचार किया जाएगा। रामपाल ने अपने वकील के माध्यम से पेश हलफनामे में कहा कि वह व उसके साथी अपना अपना दोष स्वीकार करने को तैयार हैं। उनको घटना पर पछतावा है और वे भविष्य में किसी भी परिस्थिति में इस तरह की गलती दोहराने का साहस नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अदालत और उसके आदेशों की गरिमा का सम्मान करेंगे।
हाईकोर्ट ने न्यायपालिका के खिलाफ रामपाल व उसके साथियों के रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए संज्ञान लेकर 2014 में आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी। तब से रामपाल जेल में बंद है। 2014 में जब पुलिस रामपाल को गिरफ्तार करने गई तो उसने अपनी गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में भक्तों को इकट्ठा किया। उसकी गिरफ्तारी के दौरान हिंसक झड़प हुई थी। रामपाल के खिलाफ 2014 में एक और एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर के अनुसार, रामपाल ने लगभग 600-700 महिलाओं और बच्चों को मुख्य द्वार के बाहर बैठा दिया और 1500-2000 युवा लाठी, बम और बंदूक लेकर आश्रम की छत पर तैनात कर दिया। पुलिस के आगे बढ़़ने पर सहयोगियों ने कहा कि वे राम पाल को गिरफ्तार नहीं होने देंगे और पुलिस को ऐसा करने के लिए उनके शवों के ऊपर से गुजरना पड़ेगा। ट्रायल कोर्ट रामपाल को दो अलग-अलग मामलाें में हत्या का दोषी ठहराया चुका है जिस पर पिछले दिनों हाई कोर्ट ने रोक लगाते हुए उनको जमानत का आदेश दिया था। हालांकि राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामले में वह अभी जेल में बंद है।