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सुसाइड नोट : पिता के अंतिम समय में मिलने के लिए छुट्टी नहीं दी

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पूर्व डीजीपी मनोज यादव, पीके अग्रवाल, डीजीपी शत्रुजीत, एडीजीपी अमिताभ ढिल्लों, एडीजीपी संजय कुमार सहित सात आईपीएस पर प्रताड़ना का आरोप
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दो पूर्व आईएएस पर लगाए गंभीर आरोप, जातीय भेदभाव व उत्पीड़न का लगाया आरोप



अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार का आठ पन्नों का फाइनल नोट (सुसाइड नोट) सार्वजनिक हो गया है। इसमें उन्होंने 2020 से वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से जारी जातीय भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि मैंने वर्षों तक समान व्यवहार की मांग की पर मेरे साथ सिर्फ भेदभाव हुआ। पिता के अंतिम समय में मिलने जाने के लिए छुट्टी नहीं दी गई। झूठे मामले की साजिश रची गई। निरंतर मानसिक और जातीय उत्पीड़न अब असहनीय हो गया है। मैं उम्मीद करता हूं कि मेरी मौत के बाद कम से कम सच्चाई सामने आए।
सुसाइड नोट में पूर्व डीजीपी मनोज यादव, पूर्व आईएएस टीवीएसएन प्रसाद, डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर, एडीजीपी अमिताभ ढिल्लों, एडीजीपी संजय कुमार, आईजी पंकज नैन, आईपीएस कला रामचंद्रन, आईपीएस संदीप खिरवार, आईपीएस सिबाश कबीराज और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर सुनियोजित रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
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सुसाइड नोट में लिखा है कि यह जाति आधारित भेदभाव, सार्वजनिक अपमान, लक्षित मानसिक उत्पीड़न और अत्याचार 2020 में अंबाला के एक मंदिर में जातीय भेदभाव की घटना से शुरू हुआ। हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी मनोज यादव ने इसे शुरू किया और फिर यह लगातार बढ़ता गया।
तत्कालीन गृह सचिव राजीव अरोड़ा पर आरोप लगाया कि उन्होंने समय पर अर्जित अवकाश की मंजूरी नहीं दी जिसके कारण मैं अपने पिता के निधन से पहले उनसे मिलने नहीं जा सका। इसको लेकर भी सभी वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। तत्कालीन मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद और तत्कालीन डीजीपी पीके अग्रवाल ने भी इसी तरह का व्यवहार जारी रखा।

गोपनीय पत्रों को गलत तरीके से पेश किया
आईपीएस डॉ. एमएफ किरण ने एक एक्स-कैडर पोस्ट पर तैनात करने के लिए मुझे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। इस संबंध में गोपनीय पत्रों को गलत तरीके से पेश किया गया और पूरी प्रक्रिया में समय सीमा का पालन नहीं किया जा रहा है जिससे पूरी प्रक्रिया गलत हो रही है। इस संबंध में 13 मार्च 2025 को सूचना मिली कि यह मामला सरकार के विचाराधीन है हालांकि आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।



डीजीपी ने दुर्भावना से खराब की अप्रेजल रिपोर्ट

पूरण कुमार ने शत्रुजीत कपूर पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी सुविधाओं और वेतन भुगतान में 1.1.2015 से प्रभावी अपने पैसों का निपटान करवाया लेकिन 2001 बैच के आईपीएस अधिकारियों को समान लाभ नहीं दिया गया। इससे उन्हें वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। पंचकूला में आधिकारिक आवास देने के समय मेरे लिए अतिरिक्त नियम लागू किए गए। डीजीपी कार्यालय की ओर से गलत शपथ पत्र दायर किया गया जिसमें पुलिस गेस्ट हाउस की मौजूदगी का झूठा दावा किया गया। नवंबर 2023 में आधिकारिक वाहन वापस लेना भी शत्रुजीत कपूर की देखरेख में हुआ। अप्रेजल रिपोर्ट में गलत, काल्पनिक और पक्षपाती टिप्पणियां की गईं। इसे गृह सचिव को लिखित रूप में बताया मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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शिकायतों पर नहीं हुई कार्रवाई

आईपीएस संदीप खिरवार व आईपीएस सिबास कबीराज ने गुरुग्राम में पोस्टिंग के दौरान झूठे मामलों में उन्हें फंसाने की साजिश रची। दोनों के संदिग्ध लेन-देन और असंगत संपत्ति विवरण भी संबंधित अधिकारियों के ध्यान में लाया पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आईपीएस कला रामचंद्रन की ओर से फर्जी शपथपथ दायर किया गया। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व डीजीपी पीके अग्रवाल, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का भी नाम लिखा है। उन्होंने कहा ये सभी अधिकारी जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के मुख्य साजिशकर्ता रहे।
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