अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने प्रतिबंधित एलोपैथिक दवाओं के पशु उपचार इस्तेमाल हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए पूरे राज्य में गहन अभियान चलाया गया। इस दौरान 113 थोक व खुदरा दवा दुकानों का निरीक्षण किया गया। पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली 93 दवाओं के नमूने लिए गए। सभी नमूनों को सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर ललित गोयल ने बताया, ये दवाएं गिद्धों के लिए घातक साबित हो रही हैं। इसलिए इन दवाओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि ये दवाएं मानव उपचार में स्वीकार्य हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट व नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बताया गया कि इन दवाओं के अंश पशुओं के शरीर में रह जाते हैं। जब पशु मृत हो जाते हैं तो इन पशुओं के मांस खाने से गिद्धों की किडनी फेल होती है और उनकी मौत हो जाती है। जिसकी वजह से गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई है।