पराली जलाने के मामले में मुख्य सचिव ने की उच्चस्तरीय बैठक में समीक्षा की
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सरकार ने पराली जलाने की रोकथाम के लिए मुहिम तेज कर दी है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में सोमवार को फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) हेतु राज्य कार्ययोजना के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक हुई।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने दावा किया कि इस सीजन में अब तक फतेहाबाद, जींद और कुरुक्षेत्र जिलों से पराली जलाने के तीन मामले सामने आए हैं। सभी मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है और संबंधित किसानों के भू-अभिलेखों में रेड एंट्री की गई है। इसके अलावा पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) जुर्माना भी लगाया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसे किसी भी मामले में सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश में 39.33 लाख एकड़ धान क्षेत्र है और 5.65 लाख किसानों ने पराली प्रबंधन हेतु पंजीकरण कराया है। पंजीकरण करवाने वालों में शीर्ष पांच जिले करनाल (4.69 लाख एकड़), कैथल (4.34 लाख एकड़), सिरसा (3.70 लाख एकड़), फतेहाबाद (3.61 लाख एकड़) और जींद (3.56 लाख एकड़) हैं। अकेले इस वर्ष, 471.96 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन स्वीकृत किए गए हैं। इससे किसानों को स्थायी अवशेष प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रति एकड़ 1,200 रुपये प्रदान किए जा रहे हैं।
मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में तैयारियों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें और कटाई के पीक सीजन से पहले सभी निवारक उपाय पूरी तरह लागू करें। सरकार की ओर से नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। रेड व यलो जोन में अधिकतम 50 किसानों व ग्रीन जोन में 100 किसानों पर नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक राजनारायण कौशिक ने बताया कि कई जिलों में एक बहु-विभागीय पराली प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया गया है। इस टास्क फोर्स में पुलिसकर्मी, कृषि अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं, जो खेतों की निगरानी करेंगे और पराली जलाने से रोकेंगे। उन्होंने बताया कि कुछ किसान उपग्रह की निगरानी से बचने के लिए देर रात पराली जलाने की कोशिश करते हैं इसलिए शाम की गश्त पर खास ध्यान दिया गया है। राज्य ने पराली की गांठों के भंडारण के लिए प्रमुख जिलों में 249 एकड़ पंचायती भूमि की पहचान की है। ये डिपो आग के खतरों से होने वाले नुकसान को रोकेंगे और औद्योगिक उपयोग के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक राजनारायण कौशिक ने बताया कई जिलों में एक बहु-विभागीय पराली प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया गया है। इस टास्क फोर्स में पुलिसकर्मी, कृषि अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं, जो खेतों की निगरानी करेंगे और पराली जलाने से रोकेंगे। उन्होंने बताया कि कुछ किसान उपग्रह की निगरानी से बचने के लिए देर रात पराली जलाने की कोशिश करते हैं, इसलिए शाम की गश्त पर खास ध्यान दिया गया है। राज्य ने पराली की गांठों के भंडारण के लिए प्रमुख जिलों में 249 एकड़ पंचायती भूमि की पहचान की है। ये डिपो आग के खतरों से होने वाले नुकसान को रोकेंगे और औद्योगिक उपयोग के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।