- बिना अनुमति हासिल योग्यता पर पदोन्नति होगी रद्द, विभाग ने सख्त शर्तों के साथ जारी किए आदेश
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग ने प्राचार्य पद पर पदोन्नति के नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब यदि किसी पदोन्नत प्राचार्य ने नौकरी में रहते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना प्रमोशन के लिए किसी डीम्ड विश्वविद्यालय के ऑफ कैंपस अध्ययन केंद्र से दूरस्थ शिक्षा माध्यम से स्नातकोत्तर या अन्य शैक्षणिक योग्यता प्राप्त की है तो उनकी पदोन्नति बिना किसी पूर्व सूचना के रद्द कर दी जाएगी और मूल पद पर भेज दिया जाएगा।
बीते सोमवार को लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करते हुए 96 स्नातकोत्तर अध्यापकों (पीजीटी) और पांच हेडमास्टरों सहित कुल 101 शिक्षकों को कार्यवाहक आधार पर प्राचार्य (स्कूल कैडर) पद पर पदोन्नत कर विद्यालय आवंटित किए हैं। महानिदेशक माध्यमिक शिक्षा की ओर से जारी आदेश के बाद अब डीम्ड विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल करने वाले प्रधानाचार्यों की जांच होगी। इस तरह के नए और पुराने प्रधानाचार्यों की सूची तैयार कर निदेशालय को सौंपी जाएगी। अवैध शैक्षणिक योग्यता के आधार पर पदोन्नति का कोई अधिकार मान्य नहीं होने का स्पष्ट आदेश दिया गया है।
जांच में कोई कमी मिली तो मूल पद पर भेजा जाएगा
पदोन्नति आदेशों में विभाग ने कई सख्त शर्तें भी लागू की हैं। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम 2016 के तहत विभागीय कार्रवाई लंबित है या वेतन वृद्धि रोकने जैसी सजा प्रभावी है तो उसकी पदोन्नति निरस्त की जा सकेगी। सभी पदोन्नत प्राचार्य एक वर्ष की परिवीक्षा पर रहेंगे। इस अवधि में सेवा रिकॉर्ड, पात्रता, सत्यनिष्ठा या शैक्षणिक योग्यता में कोई कमी मिलने पर उन्हें बिना नोटिस मूल पद पर भेजा जा सकता है।
70 प्रतिशत अच्छे सेवा रिकॉर्ड पर पदोन्नति, प्रशिक्षण अनिवार्य
प्राचार्य पद पर पदोन्नति 70 प्रतिशत या उससे अधिक अच्छे सेवा रिकॉर्ड के आधार पर दी गई है। नई तैनाती के बाद सभी प्राचार्यों को एससीईआरटी हरियाणा का अनिवार्य स्कूल नेतृत्व प्रशिक्षण पूरा करना होगा। वहीं, यदि किसी वरिष्ठ शिक्षक की पदोन्नति दस्तावेजों में देरी के कारण बाद में होती है तब भी उसकी वरिष्ठता उसके जूनियर से ऊपर ही मानी जाएगी।
30 दिन में देना होगा विकल्प
हाईकोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा शिक्षा विभाग ने पदोन्नत पीजीटी शिक्षकों से 30 दिन के भीतर लिखित विकल्प मांगा है। शिक्षकों को तय करना होगा कि वे पीजीटी पद पर ही कार्य जारी रखना चाहते हैं या टीजीटी या सीएंडवी पद पर वापस जाकर अपने जूनियर के समान मुख्याध्यापक (ईएसएचएम/हेडमास्टर) पद पर पदोन्नति के लिए विचार कराना चाहते हैं। समय सीमा के भीतर विकल्प नहीं देने वाले शिक्षकों को पीजीटी पद पर ही सेवा जारी रखने वाला माना जाएगा।
हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया
यह आदेश पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर करतार सिंह बनाम भारत संघ एवम अन्य एक याचिका से जुड़ा है। इसमें डीम्ड विश्वविद्यालयों के ऑफ कैंपस अध्ययन केंद्रों से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से प्राप्त डिग्रियों की वैधता पर सवाल उठाया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि यदि किसी कर्मचारी ने यूजीसी और संबंधित सरकार की स्वीकृति के बिना ऐसे अध्ययन केंद्र से डिग्री प्राप्त की है तो उस डिग्री के आधार पर नियुक्ति, पदोन्नति या अन्य सेवा लाभ का दावा नहीं किया जा सकता। हरियाणा शिक्षा विभाग ने इसी फैसले का हवाला देते हुए अवैध डिग्री के आधार पर मिली पदोन्नति रद्द करने की शर्त लागू की है।