कृषि विभाग ने उपायुक्तों व कृषि उपनिदेशकों से एक्शन प्लान समेत कई जानकारियां मांगी
निगरानी के लिए फरवरी में होगा टास्क फोर्स का गठन, कृषि मंत्री बोले- सहयोग से सहयोग की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। रबी सीजन के लिए फसल अवशेषों के प्रबंधन को लेकर अभी तैयारी शुरू हो गई है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने उपायुक्तों व कृषि उपनिदेशकों से एक्शन प्लान समेत कई जानकारियां मांगी हैं। प्रदेश के सभी 23 जिलों से ब्योरा मिलने के बाद विभाग आगामी तैयारी करेगा। फरवरी में टास्क फोर्स का गठन होगा जिससे फसल कटाई के बाद तुरंत निगरानी शुरू हो सके।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यहां रबी की मुख्य फसल गेहूं है। ऐसे में विभाग ने पहले ही निगरानी का पूरा तंत्र खड़ा करने का निर्णय लिया है जिससे नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। रबी-2025-26 के लिए फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए जिला उपायुक्तों और कृषि उपनिदेशकों से गेहूं की फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन और फसल अवशेषों का औसत आकलन पूछा है। उपायुक्तों व उप कृषि निदेशकों की रिपोर्ट के बाद ही अवशेष प्रबंधन के कृषि यंत्रों के लिए आवेदन मांगे जाएंगे और जिलेवार इसी आधार पर कृषि यंत्र किसानों को अनुदान पर देने की प्रक्रिया शुरू होगी। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा का कहना है कि हमें उम्मीद है कि किसानों का पूरा सहयोग मिलेगा और फसल अवशेष जलाने वाले किसान अब अवशेष प्रबंधन के लिए सकारात्मक कार्य करेंगे।
पिछले साल फसल अवशेष जलाने के 1832 मामले आए थे सामने
प्रदेश में पिछले वर्ष रबी की फसल के दाैरान 61 दिन निगरानी हुई थी। 1 अप्रैल से 31 मई तक निगरानी के दाैरान 1832 स्थानों पर फसल अवशेष जलाने के मामले सामने आए थे। 2024 में यही मामले 3159 थे। 2023 में 1903 और 2022 में 2887 स्थानों पर फसल अवशेषों को जलाने के मामले पकड़ में आए थे। यदि खरीफ-2025 की बात करें तो कुल 77 दिनों की निगरानी के दाैरान प्रदेश में 662 स्थानों पर पराली जलाने के मामले सामने आए थे। 2024 की तुलना में 2025 में पराली जलाने के मामले 77 प्रतिशत तक घटे हैं।