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अली खान की गिरफ्तारी: प्रोफेसर के समर्थन में हजारों लोग, रिहाई की मांग, कांग्रेस अध्यक्ष बोले- भाजपा डर गई

Mon, 19 May 2025 10:20 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सोनीपत की अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी का मामला गरमाता जा रहा है। प्रोफेसर के समर्थन में नेता और आम लोग भी उतर आए हैं। प्रोफेसर अली खान की रिहाई की मांग जोर पकड़ रही है।
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प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को पुलिस ने किया गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के समर्थन में कई लोग आ गए हैं। कई इतिहासकारों और सिविल सोसाइटी के लोगों ने प्रोफेसर की गिरफ्तारी का विरोध जताया है। एक हजार से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर प्रोफेसर की रिहाई की मांग की है। उत्तरप्रदेश के अंबडेकर नगर से भाजपा नेता व पूर्व सांसद रितेश पांडे ने प्रोफेसर की गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रितेश पांडे ने लिखा, अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं प्रोफेसर अली खान को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। मैं उनके परिवार से भी अच्छी तरह परिचित हूं। प्रोफेसर अली खान बहुत भले और समझदार व्यक्ति हैं। राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगा सकता। उन्होंने आगे लिखा, उन्होंने जो सोशल मीडिया पर लिखा है, वह बिल्कुल भी आपत्तिजनक नहीं है।

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सशस्त्र बलों, ब्यूरोक्रेट्स, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। मैं किसी भी इंसान को बदनाम करने, उसे परेशान करने, बिना वजह गिरफ्तार करने या किसी का कारोबार बर्बाद करने की कड़ी निंदा करता हूं, चाहे ये किसी छोटे गुट ने किया हो या सरकार की ओर से चूक हुई हो। 
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अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी ये दिखाती है कि भाजपा उन लोगों से डरती है जो उसकी बातों से सहमत नहीं होते। सरकार से सवाल करना देशद्रोह नहीं होता। देश के लिए काम करना और सरकार की गलतियों पर सवाल उठाना दोनों साथ-साथ हो सकते हैं। कांग्रेस के लिए देश की एकता सबसे जरूरी है। भाजपा को ये गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि वह लोकतंत्र के नाम पर तानाशाही चला सकती है। लोकतंत्र को मजबूत बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

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