दो हजार से ज्यादा मरीजों के ऑपरेशन लटके, जिला अस्पतालों की ओपीडी की संख्या में बढ़ोतरी
आईएमए हरियाणा ने राष्ट्रीय शाखा से मांगा सहयोग, राज्य सरकार ने कहा- जल्द करेंगे बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लगातार छठे दिन राज्य के निजी अस्पतालों ने आयुष्मान भारत की सेवाओं को ठप रखा। इससे सैकड़ों मरीज इलाज के लिए धक्के खा रहे हैं। दो हजार से ज्यादा मरीजों के ऑपरेशन लटक गए गए हैं। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं, कई मरीजों ने सिविल अस्पतालों की ओर रुख कर दिया है। इससे सिविल अस्पतालों में ओपीडी मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया है। उधर, हरियाणा आईएमए ने राष्ट्रीय शाखा से अपने आंदोलन के लिए सहयोग मांगा है। राष्ट्रीय शाखा ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार जल्द ही आईएमए के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगी और इसका समाधान निकालने की कोशिश करेगी।
निजी अस्पतालों ने सात अगस्त से आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज बंद कर दिया है। निजी अस्पतालों का आयुष्मान योजना का करीब 490 करोड़ रुपये बकाया है। सरकार की ओर से 245 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं मगर निजी अस्पतालों ने कहा है कि जब तक उन्हें पूरा बकाया नहीं मिलता, वे हड़ताल जारी रखेंगे।
आईएएम के पूर्व प्रधान डाॅ. अजय महाजन ने कहा कि हड़ताल के बाद सरकार की ओर से कोई संपर्क नहीं किया गया है। हालांकि सिविल सर्जन से यह जरूर कहा गया है कि वे अपने-अपने जिले में निजी अस्पतालों से संपर्क कर आयुष्मान मरीजों का इलाज शुरू करवाएं। आईएमए का दावा है कि किसी भी अस्पताल ने आयुष्मान के तहत इलाज शुरू नहीं किया है। हालांकि सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान की सेवाएं जारी हैं और पोर्टल में सिर्फ उन्हीं के रजिस्ट्रेशन दिखाई दे रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में बोझ बढ़ा
निजी अस्पतालों में आयुष्मान मरीजों का इलाज ठप होने पर सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में इजाफा हुआ है। करनाल में 11 अगस्त को ओपीडी में 2462 मरीज पहुंचे, जो रूटीन की ओपीडी के मुकाबले संख्या ज्यादा है। पानीपत ओपीडी में 1500 से बढ़कर 1800 मरीज आ रहे हैं। वहीं, कैथल के सिविल अस्पताल की ओपीडी में 1000 से 1200, यमुनानगर में 1200 से बढ़कर 1500, हिसार में 2100 से बढ़कर 2400, फतेहाबाद में 950 से बढ़कर 1000, भिवानी में 900 से बढ़कर 1200, चरखी दादरी में 900 से 1100 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। जिला अस्पतालों का दावा है कि किसी भी मरीज को परेशानी नहीं आ रही है। सभी को इलाज दिया जा रहा है।
सर्जरी में भी मरीजों की संख्या बढ़ी
सिविल अस्पतालों में ऑपरेशन कराने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है। नारनौल के अस्पताल में पहले प्रतिदिन एक-दो ऑपरेशन होते थे। अब चार-पांच हो रहे हैं। यमुनानगर के सिविल अस्पताल में पहले प्रतिदिन 50 ऑपरेशन होते थे, अब इनकी संख्या बढ़कर 60-70 पहुंच गई है। वहीं, कई मरीजों ने पीजीआई चंडीगढ़ की ओर रुख किया है। सोनीपत में सर्जन के अभाव में ऑपरेशन नहीं हो रहे। इससे मरीज पीजीआई रोहतक की तरफ रुख कर रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना की नोडल अधिकारी डाॅ. अनीता सहारण ने बताया कि जिला नागरिक अस्पतालों में पहले आयुष्मान के 10 से 12 पात्र मरीज इलाज के लिए आते थे। अब यह संख्या 25 से 30 हो चुकी है। अंबाला में भी मरीज सरकारी अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री बोलीं- आईएमए के साथ जल्द करेंगे बैठक
स्वास्थ्य मंत्री आरती राव का कहना है कि वित्त वर्ष के अभी तीन महीने बीते हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों को इलाज नहीं बंद करना चाहिए। राज्य सरकार जल्द ही आईएमए के साथ बैठक करेगी ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जाए। वित्त विभाग की ओर से बहुत जल्द अस्पतालों की रकम जारी कर दी जाएगी। वहीं सिविल अस्पताल पूरी क्षमता के साथ मरीजों का इलाज कर रहे हैं। पूरी स्थिति पर आला अधिकारी नजर बनाए हुए हैं।