कारगिल संघर्ष विराम वार्ता में शामिल रहे रिटायर्ड कर्नल डीके भारद्वाज ने बताया पाकिस्तान का दोहरा चरित्र
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। भारत-पाकिस्तान के बीच फिलहाल संघर्ष विराम हो गया है। इसके बावजूद पाकिस्तान ने शनिवार रात तक देश में कई स्थानों पर हमले किए। भारतीय सेना ने भी स्पष्ट ताैर से इसे संघर्ष विराम का उल्लंघन माना है। कारगिल संघर्ष के दौरान संघर्ष विराम वार्ता में भारतीय सेना की ओर से शामिल रहे रिटायर्ड कर्नल डीके भारद्वाज ने इसे पाकिस्तान का पुराना दोहरा चरित्र बताया।
भारतीय सेना में करीब 46 वर्ष सेवाएं देने वाले जींद निवासी रिटायर्ड कर्नल डीके भारद्वाज ने बताया कि पाकिस्तान कारगिल में जारी लड़ाई हार चुका था, उस समय पाकिस्तान के पास संघर्ष विराम के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। 25 जुलाई 1999 को सबसे पहले दोनों देशों की सेनाओं के बीच वार्ता हुई, लेकिन सिरे नहीं चढ़ सकी। अगले दिन 26 जुलाई को दोबारा बातचीत हुई और सकारात्मक परिणाम आए। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन सेनाध्यक्ष वेद प्रकाश मलिक के आदेश पर 31 जुलाई 1999 को पाकिस्तान से वार्ता हुई। वाघा बार्डर पर दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम पर लिखित में सहमति बनी।
वार्ता के दाैरान भारतीय सेना सेना की तरफ से डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशनंस (डीजीएमओ) एनसी विज, सैन्य अधिकारी आरके बतरा और स्वयं डीके भारद्वाज ने पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों मेजर जनरल अशगर खान, कर्नल लियाकत अली तूर और मेजर नदीम के साथ वार्ता की थी। कर्नल भारद्वाज के मुताबिक उस समय भी संघर्ष विराम के बावजूद पाकिस्तान नहीं माना था और कई स्थानों पर हमले किए थे।
कर्नल भारद्वाज का कहना है कि विश्व में पाकिस्तान लगभग अकेला पड़ गया है। अब पाकिस्तान चीन को खुश करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है और यह भी उद्देश्य है कि चीन से आर्थिक और हथियारों की मदद पा सके।
रिटायर्ड मेजर जनरल बोले, केवल डंडे के जोर से सुधरेगा पाकिस्तान
भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल सुधीर जाखड़ पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के विशेषज्ञ माने जाते हैं। पुराने अनुभव बताते हुए जाखड़ ने बताया कि पाकिस्तान विश्वास के लायक नहीं है, उसे केवल डंडे के जोर से ही सुधारा जा सकता है। 1999 में कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को करारी हार मिली था। हार से तिलमिलाए पाक ने जम्मू-कश्मीर में 19 बार सेना और आतंकियों के माध्यम से विफल कोशिश कीं लेकिन हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी थी।