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Chandigarh-Haryana News: स्वास्थ्य पर हरियाणा के लोगों की जेब से खर्च पांच साल में 33 फीसदी बढ़ा

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- 2018-19 में प्रति व्यक्ति 2193 रुपये था खर्च, 2022-23 में बढ़कर 2923 रुपये पहुंचा
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- स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा खर्च कर रहे हरियाणा के लोग



आशीष वर्मा


चंडीगढ़। हरियाणा में इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों की जेब से होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है। पांच साल में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च में करीब 33 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2018-19 में हरियाणा में प्रति व्यक्ति आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर (ओओपीई) 2,193 रुपये था जो 2022-23 में बढ़कर 2,923 रुपये हो गया। यानी पांच साल में प्रति व्यक्ति 730 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से लोकसभा में रखी गई एक रिपोर्ट में सामने आई है। मंत्रालय ने नेशनल हेल्थ अकाउंट्स के आंकड़ों के आधार पर राज्यवार प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च का विवरण दिया है।
हरियाणा में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च 2022-23 में 2,923 रुपये रहा, जबकि इसी अवधि में देश का औसत 2,767 रुपये था। यानी हरियाणा में प्रति व्यक्ति खर्च राष्ट्रीय औसत से 156 रुपये अधिक रहा। राष्ट्रीय स्तर पर भी यह खर्च 2018-19 के 2,155 रुपये से बढ़कर 2022-23 में 2,767 रुपये हो गया। हरियाणा में यह बढ़ोतरी हर साल दर्ज हुई। 2018-19 में प्रति व्यक्ति खर्च 2,193 रुपये था। 2019-20 में यह बढ़कर 2,358, 2020-21 में 2,510, 2021-22 में 2,647 और 2022-23 में 2,923 रुपये हो गया। सरकार के अनुसार ओओपीई का मतलब वह खर्च है जो व्यक्ति या परिवार स्वास्थ्य सेवा लेते समय अपनी जेब से सीधे करता है।
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पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम है हरियाणा के लोगों का खर्च

पड़ोसी राज्यों से तुलना करें तो हरियाणा का प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च पंजाब और हिमाचल प्रदेश से कम रहा। 2022-23 में पंजाब में यह खर्च 3,829 रुपये और हिमाचल प्रदेश में 4,047 रुपये था। वहीं राजस्थान में 2,178 व उत्तर प्रदेश में 3,219 रुपये प्रति व्यक्ति खर्च दर्ज किया गया। इस रिपोर्ट पर केंद्र सरकार की ओर से दावा किया गया है कि स्वास्थ्य पर लोगों का जेब से खर्च कम करने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शामिल हैं।



क्या होता है ओओपीई


एक व्यक्ति को इलाज व स्वास्थ्य सेवाओं पर अपनी जेब से औसतन जितना पैसा खर्च करना पड़ता है उसे प्रति व्यक्ति आउट आफ पॉकेट एक्सपेंडिचर कहा जाता है। इसमें डॉक्टर की फीस, दवाइयां, जांच व अन्य खर्चे शामिल होते हैं। यह आंकड़ा पूरे राज्य के स्वास्थ्य पर अपनी जेब से किए गए खर्च को कुल आबादी के हिसाब से औसत निकालकर तैयार किया जाता है।
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इलाज महंगा होने के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण : विशेषज्ञ


आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. अजय महाजन ने कहते हैं कि इलाज पर आम व्यक्ति का खर्च बढ़ने के एक नहीं बल्कि कई कारण हैं। पिछले पांच सालों में महंगाई बढ़ी है। दवाइयां महंगी हुई हैं और डॉक्टरों की फीस में भी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, सरकारी अस्पतालों में पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप से जांचें हो रही है। इससे भी इलाज का खर्च बढ़ा है। सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों या फिर दूर दराज के शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ता है।
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