अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अनुकंपा आधार पर करुणामूलक मासिक वित्तीय सहायता और एक्स-ग्रेशिया राशि के भुगतान में देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार को फटकार लगाई है और वित्त सचिव का तीन माह का वेतन रोकने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि यह कदम संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बजटीय या वित्तीय बाधाएं किसी नागरिक के वैध अधिकारों को रोकने का आधार नहीं बन सकतीं।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को मार्च 2024 से लंबित सभी बकाया राशि जारी करने के साथ 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है। साथ ही जवाबदेही तय करते हुए शिक्षा विभाग, हरियाणा के वित्त सचिव का वेतन तीन महीने तक रोकने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226/227 के तहत याचिका दायर कर मांग की थी कि मार्च 2024 से अब तक की करुणामूलक मासिक सहायता नियमित रूप से दी जाए और स्वीकृत 1 लाख रुपये की एक्स-ग्रेशिया राशि भी जारी की जाए। राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि वित्तीय और बजटीय सीमाओं के कारण भुगतान में देरी हुई इसलिए ब्याज नहीं दिया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि देरी की भरपाई के लिए ब्याज देना स्थापित कानूनी सिद्धांत है।