हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) परीक्षा के नियम बदले
भूतपूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों को सभी पेपरों में बैठना अनिवार्य होगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) परीक्षा में अब चार के बजाय कुल छह पेपर होंगे। हर पेपर 100 अंक का होगा। राज्य सरकार ने वैकल्पिक विषय को खत्म कर दिया है। पहले वैकल्पिक विषय के तौर पर 29 के आसपास सब्जेक्ट होते थे। छह पेपरों में अब चार पेपर जनरल स्टडीज के होंगे और बाकी दो पेपर हिंदी व अंग्रेजी (निबंध सहित) विषय के होंगे। पर्सनालिटी टेस्ट 75 अंकों का होगा। प्रत्येक पेपर की अवधि तीन घंटे की होगी। भाषा व साहित्य पेपर छोड़कर बाकी सभी के प्रश्नों के उत्तर हिंदी व अंग्रेजी में देने का विकल्प होगा। हरियाणा सरकार ने सोमवार को हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) संशोधन नियम 2025 को अधिसूचित कर दिया है।
अधिसूचित नियमों के मुताबिक मुख्य लिखित परीक्षा में सम्मिलित किए जाने वाले उम्मीदवारों की कुल संख्या विज्ञापित रिक्तियों की संख्या से बारह गुना होगी। वहीं पर्सनालिटी टेस्ट के लिए बुलाए जाने वाले उम्मीदवारों की कुल संख्या विज्ञापित रिक्तियों का तीन गुणा होगी। भूतपूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों को सभी पेपरों में बैठना अनिवार्य होगा।
पर्सनालिटी टेस्ट के लिए 45 फीसदी अंक लाना अनिवार्य
संशोधित नियमों के मुताबिक पर्सनालिटी टेस्ट में बैठने के लिए उम्मीदवारों को सभी लिखित पेपरों में 45 फीसदी अंक लाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा हिंदी व अंग्रेजी भाषा में प्रत्येक में कम से कम 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। वहीं जहां बेंचमार्क दिव्यांगता वाले उम्मीदवार पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं होंगे वहां आयोग 45 प्रतिशत अंकों की सीमा को घटा कर 35 प्रतिशत अंक तक ला सकता है। अधिसूचना के मुताबिक अंतिम चयन मुख्य लिखित परीक्षा व व्यक्तित्व/मौखिक परीक्षा अर्थात 675 अंकों में से प्राप्त किए गए कुल अंकों के आधार पर तैयार की जाने वाली वरिष्ठता सूची पर आधारित होगा। किसी भी उम्मीदवार को पेपर के उत्तर आंशिक रूप से हिंदी व अंग्रेजी में देने की अनुमति नहीं होगी।
अंक बराबर होने पर आयु में बड़े उम्मीदवार को मिलेगी तवज्जो
यदि परीक्षा में दो या दो से अधिक उम्मीदवारों के मुख्य परीक्षा व पर्सनालिटी टेस्ट में अंक बराबर हैं तो मुख्य परीक्षा में ज्यादा अंक लाने वाले उम्मीदवार को तवज्जो दी जाएगी। वहीं यदि मुख्य लिखित परीक्षा में भी अंक बराबर हैं तो आयु में बड़े उम्मीदवार को योग्यता में उच्चतर माना जाएगा। मुख्य लिखित परीक्षा स्नातक स्तर की होगी और उसका पाठ्यक्रम सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। सरकार राज्य लोक सेवा आयोग के परामर्श से राजपत्र में अधिसूचित करने के बाद प्रारंभिक या मुख्य परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम में परिवर्तन/संशोधन/पुनरीक्षण कर सकती है। आवेदन प्रारूप की लागत और परीक्षा फीस सरकार से परामर्श कर लोक सेवा आयोग द्वारा निश्चित की जाएगी। आवेदन की प्राप्ति की अंतिम तिथि तक परीक्षा के लिए निर्धारित फीस जमा करवाने में असफल उम्मीदवार को परीक्षा में बैठने के लिए अयोग्य ठहरा दिया जाएगा।