सीएम सैनी बोले- एक राष्ट्र-एक चुनाव से लोकतंत्र को मिलेगा नया आयाम
चंडीगढ़। एक राष्ट्र-एक चुनाव के मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में विभिन्न राजनीतिक दल पहुंचे। बैठक में कांग्रेस के प्रतिनिधि नहीं पहुंचे। कांग्रेस का दावा है कि उन्हें बैठक का निमंत्रण नहीं मिला। वहीं, इनेलो और जजपा ने सशर्त समर्थन दिया है। दोनों दलों ने इसमें बड़े सुधार की बात कही है। समिति की बैठक में सीएम नायब सिंह सैनी भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव से लोकतंत्र को नया आयाम मिलेगा। यह समय की मांग है।
जजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रणधीर सिंह ने कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव की बात तो ठीक है, मगर इसमें कई सुधारों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने के लिए मंशा ठीक होनी चाहिए। पिछले साल यदि चुनाव आयोग चाहता तो लोकसभा के साथ हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव हो सकते थे, मगर चुनाव आयोग ने ऐसा नहीं किया, जबकि चुनाव आयोग के पास शक्तियां थी।
वहीं, इनेलो की ओर से पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव प्रकाश भारती और प्रदेश प्रवक्ता डॉ. सतबीर सैनी ने हिस्सा लिया। भारती ने कहा कि इनेलो ने एक देश-एक चुनाव प्रणाली का सशर्त समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से होने चाहिए। मतदान होते ही उसी दिन वोटों की गिनती होनी चाहिए। चुनाव छह, सात के बजाय तीन से चार चरण में होने चाहिए।
राजनीतिक पार्टियों के चुनाव कैंपेन पर होने वाले खर्च को सरकार वहन करे। वहीं, हरियाणा कांग्रेस के मीडिया प्रभारी चांदवीर हुड्डा ने कहा कि उन्हें इस बैठक का निमंत्रण नहीं मिला था। इसलिए पार्टी का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा।
साल में तीन चुनाव हुए, हरियाणा का विकास प्रभावित हुआ : सैनी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी की एक भारत, श्रेष्ठ भारत की दूरदर्शी सोच का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव कराने से विकास कार्य बाधित होते हैं, प्रशासनिक मशीनरी चुनाव में व्यस्त हो जाती है और आमजन पर इसका सीधा असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि एक वर्ष में हरियाणा ने तीन बड़े चुनावों का सामना किया। पहले लोकसभा, फिर विधानसभा और उसके बाद फिर निकाय चुनाव। इन सभी चुनावों की आचार संहिता के चलते राज्य में विकास कार्यों की गति प्रभावित रही। पैसा भी अधिक खर्च हुआ। एक राष्ट्र-एक चुनाव से न केवल संसाधनों की बचत करेगा, बल्कि जनता की भी भावना है कि चुनाव एक साथ हों ताकि समय और धन की बर्बादी रुके।
इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आमजन की भागीदारी भी और अधिक बढ़ेगी। इसलिए एक राष्ट्र-एक चुनाव पर सभी को एक मत से समर्थन करना चाहिए। बार-बार चुनाव से मतदाताओं का रुझान भी कम हो जाता है, जिससे मतदान प्रतिशतता प्रभावित होती है। यदि चुनाव पांच वर्षों में एक बार होंगे, तो मतदाताओं में नया उत्साह देखने को मिलेगा।