छह महीने में औसतन 150 पंचों के इस्तीफे होते हैं
मतदान के बाद भी 830 सीटें में से 225 सीटें पंचों की खाली रह गईं
चंडीगढ़। ग्राम पंचायत के पंचों का चुनाव से मोहभंग हो रहा है। कुछ दिन पद संभालने के बाद वे अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं। छह महीने के अंतराल में औसतन 150 पंचों के इस्तीफे आ जाते हैं। इससे चुनाव आयोग भी चिंतित है। आयोग का कहना है कि सरपंचों के मुकाबले पंचों के पास शक्तियां कम हैं। ऐसे में वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। हरियाणा राज्य चुनाव आयुक्त धनपत सिंह ने कहा कि इस संबंध में आयोग अब राज्य सरकार को पत्र लिखकर उनकी शक्तियां बढ़ाने की सिफारिश करेगा।
हाल ही में पंचायत स्तर के उपचुनाव कराए गए थे, जिनमें 830 सीटें सिर्फ पंचों की खाली थी। वहीं, मतदान के बाद भी 225 सीटें खाली ही रह गई। सीट खाली होने की स्थिति में आयोग को हर छह महीने के अंदर-अंदर पुन: चुनाव करवाना अनिवार्य होता है। पिछली बार 830 पंचों की सीटों में से 549 निर्विरोध चुने गए, जबकि 56 पंचों का चुनाव हुआ। चुनाव आयुक्त ने कहा कि हर छह महीने में औसतन 150 पंचों के इस्तीफे आ जाते हैं।
चुनाव के दौरान कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई
धनपत सिंह ने बताया कि 15 जून को चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई। कहीं से भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना का समाचार नहीं मिला। फतेहाबाद जिले की तमसपुरा पंचायत के सरपंच, करनाल जिले की घरौंदा ब्लॉक समिति के वार्ड नंबर 12 के सदस्य, नूंह जिले की दुबालु, करहेड़ा, अंधाकि, बधह, डुंगजा पंचायत के सरपंच व कोटला के पंच व अहार के सरपंच के लिए चुनाव न्यायालय में स्टे होने के कारण नहीं करवाए गए। उन्होंने कहा कि गर्मी के बावजूद भी 73.25 प्रतिशत मतदान रहा जो दर्शाता है कि लोगों की पंचायती चुनाव में काफी दिलचस्पी है। उन्होंने बताया कि नरवाना के रेनुखुर्द और नीलोखेड़ी के गोविंदगढ़ में चुनाव नहीं हो पाए, क्योंकि वहां किसी ने नामांकन दाखिल नहीं किया।