केंद्र सरकार के निर्देशानुसार परिवहन विभाग ने एटीएस के लिए नियम तय कर एसओपी जारी की
स्टेशनों पर आमजन को देनी होंगी जरूरी सुविधाएं, साइबर सिक्योरिटी के करने होंगे पुख्ता इंतजाम
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। प्रदेश में वाहनों की फिटनेस की जांच के लिए ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) की स्थापना व संचालन के लिए नियम तय कर दिए गए हैं। केंद्रीय सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार परिवहन विभाग ने एटीएस के लिए पहली बार विस्तृत एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी की है। एटीएस की स्थापना कोई भी व्यक्ति कर सकेगा लेकिन आमजन को जरूरी सुविधाएं मुहैया करानी होंगी। खास बात यह है कि स्टेशनों पर साइबर सिक्योरिटी के पुख्ता इंतजाम करने होंगे।
प्रदेश में ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन की स्थापना के लिए संबंधित व्यक्ति के पास कम से कम 1 एकड़ जमीन होनी चाहिए। इसका लाभ यह होगा कि फिटनेस जांच के लिए आने वाले वाहनों को पर्याप्त स्थान मिल सकेगा। स्टेशन की स्थापना के लिए एनएसडब्ल्यूएस (नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम) पर आवेदन करना होगा और निर्धारित शुल्क जमा कराना होगा। विभागीय जांच के बाद जरूरी मशीनों से लेकर आमजन के उपयोग के संसाधन भी जुटाने होंगे। इन स्टेशनों के संचालन के बाद नियमित ऑडिट होगा। वाहन एप के माध्यम से फिटनेस प्रमाण पत्र मिलेंगे। किसी भी तरह की साइबर ठगी व फर्जीवाड़े से बचाव के लिए साइबर सिक्योरिटी की पुख्ता व्यवस्था करनी होगी। स्टेशनों पर वाहनों की जांच के लिए जरूरी ऑटोमैटिक मशीन लगानी होंगी। प्रत्येक शिफ्ट में कम से कम 7-7 कर्मचारी तैनात रहेंगे।
10 वर्ष बाद स्टेशन के संचालन के लिए रिन्यूवल की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। स्टेशन पर शुल्क और सुविधाओं का ब्योरा डिस्प्ले बोर्ड पर दर्शाना होगा। परिवहन विभाग के आयुक्त अतुल कुमार का कहना है कि केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार एटीएस की स्थापना व संचालन के लिए नियम तय कर दिए हैं। नए-पुराने सभी स्टेशनों को इन नियमों का पालन करना होगा।
परीक्षण स्थल पर वाहनों के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए
ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशनों पर वाहनों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होना जरूरी है ताकि वाहन संचालकों को कोई परेशानी न हो। परीक्षण स्थल पर दो पहिया वाहनों के लिए न्यूनतम 15 मीटर लंबाई और 5 मीटर चाैड़ाई का स्पेस (जगह) होना अनिवार्य है। तीन पहिया, हलके, मध्यम व भारी वाहनों के लिए 32 मीटर लंबाई और 7 मीटर चाैड़ाई का स्पेस रखना अनिवार्य होगा। प्रवेशद्वार दो पहिया वाहनों के लिए 3 मीटर, तिपहिया वाहनों के लिए 10 मीटर और मध्यम-भारी वाहनों के लिए 18 मीटर चाैड़ा होना चाहिए। स्टेशनों पर आमजन के लिए पार्किंग, प्रशासनिक भवन, प्रतीक्षा कक्ष, आईटी सर्वर आदि की व्यवस्था होनी चाहिए।
वाहनों की पूरी तकनीकी जांच होगी
ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशनों पर वाहनों की पूरी तकनीकी जांच होगी। वाहनों के टायर से लेकर इंजन, प्रदूषण का स्तर, बैटरी, वाहन की कार्य क्षमता, सड़क पर संचालन के लिए वाहन उपयोगी है या नहीं आदि की विस्तृत जांच की जाएगी।