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Chandigarh-Haryana News: लोग पूछते हैं, आगे क्या करोगे? जवाब किताबों, लोगों व नए रास्तों में छिपा है

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चंडीगढ़। लोग अक्सर पूछते हैं अब आगे क्या करोगे? यह सवाल स्कूल के दिनों से ही पीछा करता रहा है। तब लगता था जब नदी आएगी तो पार कर लेंगे इतनी चिंता क्यों। यही सोच आगे भी काम आई।
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हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने आगे क्या करेंगे जैसे बार-बार पूछे जाने वाले सवाल के जवाब में अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट साझा की है।
उन्होंने लिखा, आईपीएस सेवा के दौरान आठ-नौ साल मैदान में रहा। कभी एसपी, कभी सीपी, आईजी, एडीजी, रेंज और डीजीपी के रूप में। उस दौर में घटनाएं खुद रास्ता तय करती थीं हर दिन एक नया मोर्चा होता था। अब फिर वही समय लौट आया है, जब काम खुद गढ़ना है।
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ओपी सिंह लिखते हैं कि पिछले अक्तूबर छठ पूजा पर घर जाना हुआ। पुराने लोगों से मुलाकात हुई। वही अपनापन, वही स्नेह। जीवन के अंतिम पड़ाव से जूझते चेहरे, रोजगार की तलाश में बाहर गए बच्चे और हाल पूछने पर भर आती आंखें। परिवार में भी वही अपेक्षा कुछ बड़ा करो, फिर से। वे लिखते हैं, सोचता हूं, इससे बड़ा क्या हो सकता है कि जीवन के ‘चौथेपन’ से जूझ रहे अपने लोगों को समय दूं। यही भाव उनकी किताब हौसलानामा के अंतिम अध्याय चौथेपन की मार में झलकता है।
सरकार और युवाओं के रिश्ते पर लिखी जा रही एक किताब अभी अधूरी है जिसे पूरा करना है। साथ ही, पुलिस व्यवस्था को ताकतवर नहीं बल्कि अधिक मजबूत, संवेदनशील और कारगर कैसे बनाया जाए, इस विषय पर भी एक किताब आकार ले रही है।
उन्होंने आगे लिखा कि पांच-छह सौ पन्नों की आत्मकथा भी लिखनी है। जेपी आंदोलन, आपातकाल, शोले और उसके बाद का दौर सब आज भी स्मृतियों में ताजा है। अंत में वे कहते हैं, आखिर दुनिया अच्छी कहने की नहीं, अच्छी बनाने की चीज़ है। ब्यूरो
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