- परियोजना के लाइसेंस की वैधता पर फैसले तक जारी रहेगी रोक
- गुरुग्राम में 8 हजार करोड़ से अधिक के बजट की है परियोजना
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम की 8 हजार करोड़ से अधिक बजट की आवासीय परियोजना से जुड़े विवाद में ओबेरॉय रियल्टी को फिलहाल किसी भी नए फ्लैट का आवंटन करने और परियोजना में किसी तीसरे पक्ष का अधिकार (थर्ड पार्टी राइट्स) बनाने से रोक दिया है। अदालत ने यह आदेश तब तक प्रभावी रहने को कहा है, जब तक हरियाणा के नगर व ग्राम नियोजन विभाग (डीटीसीपी) के निदेशक परियोजना के लाइसेंस की वैधता को चुनौती देने वाली लंबित शिकायत पर निर्णय नहीं ले लेते।
यह आदेश न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने एडवांस इंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (एआईपीएल) की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में वर्ष 2025 में जारी विकास लाइसेंस और उसके बाद लाइसेंस हस्तांतरण की मंजूरी को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता एआईपीएल ने अदालत से आग्रह किया है कि 12 मई 2025 को जारी लाइसेंस संख्या-69 पर रोक लगाई जाए। साथ ही 17 जून 2025 के उस आदेश को भी रद्द किया जाए, जिसके जरिए लाइसेंस दूसरे डेवलपर के नाम स्थानांतरित करने की मंजूरी दी गई थी। कंपनी ने परियोजना पर अपना अधिकार होने का दावा करते हुए ओबेरॉय रियल्टी के पक्ष में निष्पादित बिक्री विलेख को भी निरस्त करने की मांग की है।
याचिका में आरोप लगाया कि परियोजना के लाइसेंस और हस्तांतरण की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों सहित अन्य कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। इन आरोपों को लेकर डीटीसीपी के समक्ष पहले से शिकायत लंबित है, जिस पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।
हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि लाइसेंस रद्द करने संबंधी शिकायत अभी डीटीसीपी निदेशक के समक्ष विचाराधीन है और मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक सक्षम प्राधिकारी शिकायत का निस्तारण नहीं कर देता, तब तक परियोजना में कोई नया आवंटन नहीं किया जाएगा और न ही किसी तीसरे पक्ष के पक्ष में अधिकार बनाए जाएंगे।