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Chandigarh-Haryana News: सरकार यूजीसी से सख्त मानदंड तय कर सकती है या नहीं, तय करेगी बड़ी बेंच

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- हरियाणा में सहायक प्रोफेसर भर्ती से जुड़ा हुआ है पूरा विवाद
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- हाईकोर्ट की दो समन्वय पीठों के फैसलों में अलग-अलग राय सामने आने के बाद निर्णय


चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सहायक प्रोफेसरों की भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न को बड़ी पीठ के समक्ष भेज दिया है। बड़ी पीठ तय करेगी कि क्या राज्य सरकारें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2018 के विनियमों में निर्धारित न्यूनतम पात्रता से अधिक कड़े चयन मानदंड निर्धारित कर सकती हैं। साथ ही स्पष्ट किया जाएगा कि क्या राज्य सरकारों के लिए यूजीसी विनियम, 2018 को पूरी तरह से लागू करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। हालांकि, हाईकोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की चयन प्रक्रिया को वैध मानते हुए उसे चुनौती देने वाली अभ्यर्थी की याचिका खारिज कर दी।


जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि इस मुद्दे पर हाईकोर्ट की दो समन्वय पीठों के फैसलों में अलग-अलग राय सामने आई है। ऐसे में कानून की स्पष्ट व्याख्या और एकरूपता बनाए रखने के लिए दोनों महत्वपूर्ण प्रश्नों पर बड़ी पीठ का निर्णय आवश्यक है। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि मामले को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उचित पीठ के गठन के लिए रखा जाए।
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मामला हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से सहायक प्रोफेसर के 123 पदों पर भर्ती के लिए जारी विज्ञापन से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया के तहत पहले अर्हकारी स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की गई। इसके बाद विषय ज्ञान परीक्षा हुई, जिसे अंतिम मेरिट में 87.5 प्रतिशत वेटेज दिया गया, जबकि साक्षात्कार के लिए 12.5 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए।
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याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह चयन प्रक्रिया यूजीसी विनियम, 2018 के अनुरूप नहीं है। यूजीसी के नियमों में अभ्यर्थियों की शॉर्ट लिस्टिंग शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध कार्य और प्रकाशित शोधपत्रों के आधार पर की जानी चाहिए और साक्षात्कार को प्रमुख महत्व दिया गया। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता स्वयं पूरी चयन प्रक्रिया में शामिल हुई थी। उसने स्क्रीनिंग परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली थी, लेकिन विषय ज्ञान परीक्षा में निर्धारित 35 प्रतिशत न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सकी। इसके बाद उसने भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कोई भी अभ्यर्थी यदि बिना किसी आपत्ति के चयन प्रक्रिया में भाग लेता है तो यह माना जाएगा कि उसने उस प्रक्रिया को स्वीकार कर लिया है। ऐसे में असफल होने के बाद वह उसी प्रक्रिया या उसके नियमों पर सवाल नहीं उठा सकता।
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