महानगर विकास प्राधिकरणों में शामिल शहरों में भी आयोजित की जाएंगी समन्वय बैठक
संबंधित उपायुक्त बैठकों का एजेंडा और मिनट्स डीएमसी के परामर्श से करेंगे तैयार
चंडीगढ़। प्रदेश के शहरों और कस्बों में समस्याओं के समाधान के लिए उपायुक्त को और शक्तियां प्रदान की गईं हैं। सरकार ने निर्णय लिया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से लेकर बरसाती पानी की निकासी, पेयजल-सीवरेज जैसे कार्यों के समाधान के लिए मासिक समन्वय बैठक करवाई जाएगी। उपायुक्तों की निगरानी में ही एजेंडे तैयार किए जाएंगे।
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि संबंधित उपायुक्त बैठकों का एजेंडा उप नगर निगम आयुक्त (डीएमसी) के परामर्श से तैयार कराएंगे। अंतर-एजेंसी समन्वय से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पंचकूला और हिसार के उपायुक्तों को छोड़कर यह आदेश प्रदेश के दूसरे सभी जिलों के उपायुक्तों और संबंधित विभागों और अधिकारियों की मासिक बैठक को लेकर लागू रहेंगे। जब भी जिले में प्रभारी प्रशासनिक सचिव आएंगे तो उनके समक्ष सभी समस्याएं रखी जाएंगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
सरकार के आदेश हैं कि महानगर विकास प्राधिकरणों (गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पंचकूला और हिसार ) में शामिल शहरों में सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों की नियमित मासिक समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण, फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण सोनीपत महाविकास प्राधिकरण की मासिक बैठकें शहरी विकास के प्रधान सलाहकार की अध्यक्षता में होंगी। वहीं, पंचकूला महाविकास प्राधिकरण की मासिक बैठक नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित की जाएंगी। हिसार महाविकास प्राधिकरण की मासिक बैठक प्रभारी प्रशासनिक सचिव हिसार की अध्यक्षता में आयोजित होंगी। सरकार के यह भी आदेश हैं कि जिला प्रशासन, नगर निगम, महानगर विकास प्राधिकरण और शहरी विकास प्राधिकरण में से जो भी सबसे वरिष्ठ अधिकारी होंगे उन्हें समग्र समन्वय अधिकारी बनाया जाएगा। यही अधिकारी संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए उस शहर में तैनात विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों की समीक्षा बैठकों की भी अध्यक्षता करेंगे।