फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh-Haryana News: पाक के पहले पीएम के परिवार से जुड़ी जमीन मामले में मुख्य सचिव व सीबीआई को नोटिस

विज्ञापन
विज्ञापन
फर्जी वारिसों पर फर्जी दस्तावेजों से अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन हड़पने का आरोप
विज्ञापन


एफआईआर के बावजूद दबाव में काम करने का हरियाणा पुलिस पर लगाया गया है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। करनाल जिले में हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा से लगते क्षेत्र डबकौली में पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के परिवार एवं जमीन से जुड़ा लगभग 1200 एकड़ भूमि का विवाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सीबीआई, हरियाणा के मुख्य सचिव, करनाल के एसपी व इंद्री के एसएचओ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मामले मेंं सोनू व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि विवादित भूमि पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की थी। बंटवारा होने के बाद वह पाकिस्तान चले गए थे। इसके बाद इस भूमि को लेकर विवाद आरंभ होने लगा। भूमि माफिया ने इस जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए और फर्जी वारिसों के जरिए भूमि का पंजीकरण आरंभ कर दिया। क्षेत्रीय लोगों ने लगातार इस भूमि को बचाने का प्रयास किया।
विज्ञापन


ग्रामीणों ने शुरुआत में मंत्री अनिल विज को शिकायत दी थी। इसके बाद काफी समय जांच चलती रही। जब मामला लंबे समय तक लटका रहा था तो ग्रामीणों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद करीब 17 नामजद सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दी थी। पुलिस ने एफआईआर में भ्रष्टाचार की धाराएं जोड़ दी थीं। फिर मामले में एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने बाद में एफआईआर भी रद्द कर दी गई। इसके बाद ग्रामीण फिर से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट चले गए।

शिकायतकर्ताओं द्वारा आरोप लगाया गया था कि पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के चचेरे भाई शमशाद अली खान, इरशाद अली खान, ईजाज अली खान, मुमताज अली खान, ईमताल अली खान, जाहंगीर बेगम पत्नी लियाकतल अली खान, जोकि आजादी के दौरान पाकिस्तान चले गए थे। यह विवादित 1200 एकड़ जमीन इनकी ही थी।
विज्ञापन


1951 में भारत सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया गया कि उस गांव की कृषि जमीन को कस्टोडियन घोषित किया गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश से कुछ लोग इस जमीन में फर्जी वारिस बन गए और आगे जमीन को दूसरे एक दर्जन से ज्यादा भू-माफियों को बेच दिया। शिकायत में कुछ नेताओं, तत्कालीन उच्च अधिकारियों भू-माफियाओं आदि पर मिलीभगत कर जमीन में हिस्से अपने नाम भी करवाए जाने के आरोप लगाए गए थे। याचिका में कहा गया कि हरियाणा पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती है। ऐसे में जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें