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हरियाणा में मंदिरों-तीर्थों पर अब नहीं दिखेगा कचरे का ढेर: 500 मीटर का सफाई जोन, हर 50 मीटर पर चार डस्टबिन

Fri, 02 Oct 2026 10:08 AM IST
Nivedita आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सफाई व्यवस्था केवल झाड़ू तक सीमित नहीं रहेगी। खुले में कचरा रखने पर रोक होगी। प्रमुख रास्तों पर हर 50 मीटर और श्रद्धालुओं की कतार वाले स्थानों पर हर 25 मीटर पर चार तरह के डस्टबिन लगाए जाएंगे।
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हरियाणा में मंदिरों-तीर्थ स्थलों पर नहीं दिखेगा कचरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों पर अब कचरे का ढेर नहीं दिखेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने सालभर की विशेष सफाई व्यवस्था तैयार की है। पहले चरण में पंचकूला के मनसा देवी मंदिर, गुरुग्राम के शीतला माता मंदिर और कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर को शामिल किया गया है। 
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हर स्थल के आसपास 500 मीटर का सफाई क्षेत्र बनेगा। इसमें पहुंच मार्ग, पार्किंग, दुकानें और आसपास के अन्य क्षेत्र भी शामिल होंगे। सफाई व्यवस्था केवल झाड़ू तक सीमित नहीं रहेगी। खुले में कचरा रखने पर रोक होगी। प्रमुख रास्तों पर हर 50 मीटर और श्रद्धालुओं की कतार वाले स्थानों पर हर 25 मीटर पर चार तरह के डस्टबिन लगाए जाएंगे। इनमें गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष कचरा अलग-अलग डाला जाएगा। भीड़ बढ़ने पर अतिरिक्त सफाई कर्मचारी और कचरा वाहन तैनात किए जाएंगे।
 
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फूल नदी-तालाब में नहीं, अलग कलश में जाएंगे
मंदिरों और घाटों पर फूल-निर्माल्य के लिए अलग कलश रखे जाएंगे। श्रद्धालु फूल और पूजा सामग्री नदी, तालाब या अन्य जलस्रोतों में नहीं डाल सकेंगे। आगे अन्य प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों की पहचान कर उन्हें भी इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।

100 लोगों पर एक शौचालय, आधे महिलाओं के लिए
बड़े आयोजनों में 100 उपयोगकर्ताओं पर कम से कम एक शौचालय सीट उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें कम से कम 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए होंगी। बड़े मेलों में जरूरत के अनुसार मोबाइल शौचालय भी लगाए जाएंगे। गंदे पानी और मल-गाद को निर्धारित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाना अनिवार्य होगा।

भंडारे-लंगर भी आएंगे निगरानी के दायरे में
500 मीटर के दायरे में आने वाले भंडारे, लंगर, प्रसाद की दुकानें, धर्मशालाएं, होटल और ढाबे बड़े कचरा उत्पादक माने जाएंगे। इन्हें कचरा अलग-अलग रखना होगा और अपने डस्टबिन लगाने होंगे। सिंगल यूज प्लास्टिक से भी बचना होगा। नियम तोड़ने पर जुर्माना, जमा राशि जब्त करने से लेकर अनुमति रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। जरूरत पड़ने पर अस्थायी पानी-बिजली कनेक्शन भी काटे जा सकते हैं।

24 घंटे में कचरा साफ, एक किलोमीटर तक सफाई
तीर्थ क्षेत्र सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त होंगे। आयोजन खत्म होने के 24 घंटे के भीतर पूरा कचरा हटाना होगा। आसपास एक किलोमीटर तक पान-तंबाकू के दाग और गंदगी भी साफ करनी होगी। हर स्थल पर कचरे का सात दिन का रिकॉर्ड रखा जाएगा। नोडल अधिकारी नियुक्त होगा और बड़े आयोजनों में दिन में दो बार जियो-टैग तस्वीरों से निगरानी की जाएगी। कचरा फैलाने या जलाने पर मौके पर ही जुर्माना लगाया जा सकेगा।

इसलिए लिए ये तीनों धार्मिक स्थल
मनसा देवी मंदिर:
नवरात्र में करीब 2.48 टन कचरा निकला, जो सामान्य दिनों से करीब 10 गुना अधिक था।
शीतला माता मंदिर: रोजाना 200 किलो से अधिक फूल निकलते हैं। त्योहारों में यह मात्रा करीब 1,000 किलो तक पहुंच जाती है।
ब्रह्मसरोवर: रोज करीब 5-6 हजार श्रद्धालु-पर्यटक पहुंचते हैं। यहां का अलग कचरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। पूरे कुरुक्षेत्र से रोज करीब 100 टन कचरा निकलता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कवायद
सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर गंदगी को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद 5 मई 2026 को कोर्ट ने राज्यों को प्रमुख पर्यटन व तीर्थ स्थलों की पहचान कर विशेष कचरा प्रबंधन व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टरों को निगरानी के लिए विशेष प्रकोष्ठ बनाने और नियमित रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी भी दी गई है।
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