चंडीगढ़। प्रदेश में अन्नदाताओं के लिए धान और अन्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि का सरकार की ओर से ऐलान करना ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। धान की एमएसपी में तीन फीसदी की वृद्धि यानि मात्र 69 रुपये की गई है। कांग्रेस कार्यकाल के दौरान हर साल लगभग 14 से 15 फीसदी वृद्धि होती थी। कांग्रेस सरकार भाजपा के मुकाबले लगभग पांच गुणा ज्यादा दाम देती थी।
हुड्डा ने कहा कि भाजपा कार्यकाल के दौरान महंगाई लगातार आसमान छू रही है। पेट्रोल-डीजल के दामों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सिंचाई से लेकर लेबर, ट्रांसपोर्ट, खाद, बीज, दवा तक हर चीज के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। खेती से भी भाजपा सरकार टैक्स वसूली कर रही है। इसके अतिरिक्त किसानों की फसल मौसम और सरकारी अनदेखी की भेंट चढ़ रही हैं। किसान खेती छोड़कर दिहाड़ी-मजदूरी करने को मजबूर हो रहे हैं।
इस तरह की विषम परिस्थितियों में सरकार किसानों को अनाज के उचित दाम, सब्सिडी, टैक्स और कर्ज से मुक्ति दे। अपने वादे के मुताबिक भाजपा को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करके सीटू फार्मूले के तहत फसलों का दाम देना चाहिए। ऐसा करने की बजाय सरकार हर सीजन से पहले एमएसपी में वृद्धि के ऐलान को लेकर औपचारिकता पूरी करती है। किसानों को एमएसपी से कम रेट पर निजी एजेंसियों के हाथों लुटना पड़ता है।