-बिना विज्ञापन जारी किए पीएचडी में प्रवेश देने का याचिका में है आरोप
-2020-21 में 15 पदों का विज्ञापन जारी कर 57 को दिया पीएचडी में प्रवेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने विलंब करने की रणनीति अपनाने पर महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी पर 25 हजार रुपये का जुुर्माना लगाया है। इससे पहले हाईकोर्ट इसी मामले में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन पर 5 हजार जुर्माना लगा चुका है।
याचिका दाखिल करते हुए अजित सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया था कि यूनिवर्सिटी पीएचडी में प्रवेश देने के दौरान यूजीसी के नियमों की अनदेखी कर रही है। लोगों सूचना दिए बगैर प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जा रही है। हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि 2020-21 के दौरान यूनिवर्सिटी ने पीएचडी के 15 पदों को विज्ञापित किया था लेकिन इनकी एवज में 57 लोगों को प्रवेश दे दिया गया। नियमों की खुलकर अनदेखी की गई और कई बार तोे विज्ञापन ही जारी नहीं किए गए। याची ने इस दौरान पीएचडी में प्रवेश पाने वालों को भी याचिका में पक्ष बनाया था। कोर्ट ने कहा कि अब इन छात्रों की पढ़ाई में दखल करने का कोई औचित्य नहीं बनता है। हाईकोर्ट ने इन अतिरिक्त छात्रों पर यूजीसी को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। कई तारीक बीत जाने के बाद भी जवाब न आने पर सोमवार को हाईकोर्ट के कड़े रुख पर यूनिवर्सिटी ने कहा कि उन्हें यूजीसी का पत्र आज ही मिला है और इस पर जवाब के लिए समय चाहिए। यूजीसी ने कहा कि पत्र मार्च में लिखा गया था और मार्च में ही यूनिवर्सिटी के पास पहुंच गया था। हाईकोर्ट ने इसे पूरी तरह से विलंब करने की रणनीति बताते हुए अब 25 हजार रुपये का जुर्माना यूनिवर्सिटी पर लगाते हुए इसे पीजीआई पुअर पेशेंट फंड में जमा करवाने का आदेश दिया है।