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Chandigarh-Haryana News: मारकंडा व टांगरी ओवरफ्लो, कई गांवों में बाढ़ का अलर्ट, घग्गर व यमुना खतरे के निशान पर

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-कुरुक्षेत्र व अंबाला में कई गांवों के लोग सुरक्षित स्थानों पर गए, कैथल और तोशाम में भी हालात चिंताजनक
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अमर उजाला ब्यूरो/संवाद
करनाल/पानीपत/अंबाला/कैथल। पहाड़ों में मूसलाधार व मैदानी इलाकों में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण हरियाणा में मारकंडा, घग्गर, टांगरी, बेगना व यमुना उफान पर हैं। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में मारकंडा और अंबाला में मारकंडा व टांगरी का पानी तटों से ऊपर निकल गांवों व खेतों में घुस गया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार शुक्रवार रात व शनिवार सुबह मारकंडा का पानी खतरे के निशान के 10 फीट व टांगरी का करीब तीन फीट ऊपर बहा। पानी ने दोनों जिलों के कई गांवों व खेतों की तरफ रुख कर लिया जहां बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

प्रशासन ने बाढ़ की आशंका वाले इन गांवों में सतर्क रहने की मुनादी भी करवाई जिसके बाद कई लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तरफ चले गए हैं। मारकंडा का जलस्तर बढ़ने के कारण कठवा, पट्टी जामड़ा, गुमटी, मलकपुर, कलसाना, तंगौर, मुगलमाजरा सहित दर्जन भर गांवों में फसलें डूब गईं। कृषि विभाग ने करीब 1600 एकड़ फसल खराब होने की आशंका जताई है। टांगरी नदी ने अंबाला के हेमामाजरा, नहोनी, गोला गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। टांगरी नदी का पानी शुक्रवार रात अंबाला कैंट में भी खतरे के निशान तक पहुंच गया था, लेकिन शनिवार दोपहर नीचे आ गया।
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यमुना नदी में भी पानी बढ़ता जा रहा है। पानीपत में शनिवार को यमुना का जलस्तर खतरे के निशान (231.00 मीटर) तक पहुंच गया। यहां तामशाबाद व नवादा-आर गांव के पास शनिवार को तटबंध भरने का काम नहीं हो सका। पत्थर की एक पक्की ठोकर यमुना के रेत में धंस गई है। पानी का दबाव बढ़ने पर यहां तटबंध टूटने का खतरा पैदा हो गया है।

कैथल के गुहला-चीका में घग्गर का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया है। कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले दो दिनों से नदी में पानी का बहाव तेज है और किनारों पर लगा खरपतवार नदी के पानी में बहकर आना शुरू हो गया है।

शनिवार देर शाम तीनों ही नदियों में पानी का स्तर शुक्रवार रात की अपेक्षा कुछ कम हुआ है। पहाड़ों पर बारिश रुकती है तो यह घट सकता है और खतरा टल सकता है।

शाहाबाद के एसडीएम चिनार चहल ने बताया कि मारकंडा में शुक्रवार आधी रात से ही जलस्तर बढ़ने से प्रशासन अलर्ट हो गया था। गांवों को सतर्क कर दिया गया। पुख्ता प्रबंधों के साथ टीमें भी नदी के आसपास तैनात कर दी गईं थीं। कठवा व कई अन्य गांवों तक पानी पहुंचा है लेकिन फिलहाल किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है।



भिवानी-घग्गर ड्रेन दांग खुर्द के समीप टूटी, गांव में तीन-चार फीट तक जलभराव

भिवानी की तोशाम तहसील के गांव सागवान में भिवानी-घग्गर ड्रेन दांग खुर्द के समीप टूटने से हालात बेकाबू हो गए। गांव का श्मशान घाट, पंचायत घर, आंगनबाड़ी केंद्र, अखाड़ा, जलघर और राजकीय उच्च विद्यालय पानी में डूब गए हैं। बरसाती पानी गांव में घुस जाने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। ड्रेन का पानी ओवरफ्लो होकर आबादी का रुख कर चुका है। सार्वजनिक स्थलों पर तीन से चार फीट तक जलभराव हो गया है।



सोम नदी शांत, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

व्यासपुर (यमुनानगर)। आदिबद्री में हिमाचल की पहाड़ियों से निकल रही सोमनदी अब कुछ शांत है। शनिवार को नदी में पानी कम हो गया। नदी में एक हजार क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। अब पानी सामान्य बह रहा है। ऐसे में आसपास के किसानों व ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। शुक्रवार को सोमनदी रौद्र रूप में आ गई थी। इससे किसानों को फसलों की चिंता सताने लगी थी। चितपुर व खानुवाला गांव में सोम नदी का पानी प्रवेश करने पर भारी नुकसान पहुंचा।



खतरे के निशान से 2.5 फीट ऊपर बह रहा था पानी, बड़ा खतरा टलाः सिंचाई मंत्री

सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने शनिवार को कहा कि शुक्रवार रात टांगरी नदी का जलस्तर 9.5 फीट (लगभग 20,900 क्यूसेक) तक पहुंच गया था जबकि खतरे का निशान 7.0 फीट (15,400 क्यूसेक) है। ऐसी स्थिति पिछले वर्षों में अंबाला छावनी की कई कॉलोनियों के जलमग्न होने और करोड़ों रुपये के नुकसान का कारण बन चुकी है लेकिन इस बार समय रहते उठाए गए कदमों से खतरा टल गया।
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फोटो कैप्शन : कुरुक्षेत्र के गांव कठवा के समीप मारकंडा ओवरफ्लो होकर खेतों में बहने लगी तो देखते ही देखते आसपास के उक्त गांवों तक भी पानी पहुंच गया। खेत जलमग्न हो गए तो सड़कें भी पानी में डूब गई।
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