विभाग आढ़तियों को ठहरा रहा फसल भीगने का जिम्मेदार, आढ़ती बोले-सरकार दे किसानों को मुआव
- बीमा में भी कवर नहीं होती मंडियों में भीगी फसलें
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में किसानों को पहले खेतों में खड़ी फसलों में नुकसान हुआ। अब मंडियों में किसानों की धान, बाजरा की फसलें भीग गईं। कई मंडियों में तो अनाज पानी के साथ बह गया लेकिन सरकार के पास नुकसान की भरपाई का कोई इंतजाम नहीं है। बीमा में भी इस तरह के नुकसान को कवर नहीं किया जाता। हरियाणा कृषि एवं कल्याण विभाग, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने मंडियों में फसल भीगने के लिए आढ़तियों को जिम्मेदार ठहराया है। बोर्ड का कहना है कि आढ़तियों ने मंडियों में पूरे इंतजाम नहीं किए।
हरियाणा कृषि एवं कल्याण विभाग, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने नियमों का हवाला देकर मुआवजे के प्रावधानों से इन्कार किया है। मंडियों में इंतजामों की बात करें तो बरसाती पानी की निकासी के लिए पर्याप्त मोटर तक नहीं लगाई गई हैं। हरियाणा राज्य मंडी आढ़ती एसोसिएशन के राज्य प्रधान डाॅ. राम तायल ने बताया कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। मंडियों में आढ़तियों ने तिरपाल और फसलों की बोरियों को क्रेट पर रखने का पूरा इंतजाम कर लिया था। राज्य प्रधान ने मांग की है कि सरकार बाजरा में 575 रुपये के बजाय 1000 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर का लाभ किसानों को दे। धान की खरीद के लिए नमी की मात्रा 17 प्रतिशत के बजाय 18 से 19 प्रतिशत की जाए। मंडियों में धान और बाजरा की फसलों को नुकसान की भरपाई के लिए 30 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा तुरंत दिया जाए। आढ़तियों की खरीद में मिलने वाले कमीशन में बढ़ोतरी की जाए।
वर्जन
प्रदेश के क्रय केंद्रों और मंडियों में आवश्यक इंतजामों के लिए पहले ही आदेश दिए गए थे। किसानों की फसलों को मंडियों में कोई नुकसान होता है तो इसके लिए वह मंडियों में सचिवों को लिखित में शिकायत दें। नुकसान को लेकर यदि कोई निर्णय लिया जाता है तो इन किसानों को राहत मिल सकती है।
राजेश नागर, मंत्री, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, हरियाणा।
33 हजार एकड़ गिरदावरी का कार्य शेष
प्रदेश में विशेष गिरदावरी का कार्य जारी है। क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज कराए गए 3103477.11 एकड़ में से मंगलवार तक पटवारियों के स्तर पर केवल 33983.72 एकड़ फसलों की गिरदावरी का कार्य शेष रह गया है। क्षेत्रीय राजस्व अधिकारियों के माध्यम से 328629.27 एकड़, एसडीएम स्तर पर 330612.12 एकड़ की गिरदावरी के सत्यापन का कार्य होना है। जिला राजस्व अधिकारियों के माध्यम से 133742.05 एकड़, उपायुक्तों के माध्यम से 83854.83 एकड़ और मंडल आयुक्तों के स्तर पर केवल 7580.03 एकड़ गिरदावरी के सत्यापन का कार्य ही शेष रह गया है।