फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लेह लद्दाख ट्रिप: 4 साल से विभागीय जांच अटकी, अब एसीबी की एंट्री

विज्ञापन
विज्ञापन
तीन खबरों के पीडीएफ
विज्ञापन


शिकायतकर्ता विनोद शेखावत को नोटिस, आज एसीबी दफ्तर में उनके बयान होंगे दर्ज

हरियाणा कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग में स्टडी टूर के नाम पर सरकारी राशि के दुरुपयोग का मामला

जुलाई 2022 में स्टडी टूर की अनुमति पर परिवार के साथ लेह लद्दाख की सैर कर आए अधिकारी और कर्मचारी

कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। हरियाणा कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के चर्चित लेह-लद्दाख ट्रेनिंग मामले में अब राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एंट्री हो गई है। एसीबी ने मामले की जांच शुरू करते हुए शिकायतकर्ता विनोद शेखावत को नोटिस जारी कर शुक्रवार को पंचकूला स्थित दफ्तर बुलाया है। इस मामले में पंचकूला में तैनात सब इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार को जांच अधिकारी बनाया गया है।

इधर इस मामले में हरियाणा कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग में जांच व कार्रवाई की फाइल 52 महीने से एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के टेबल पर सैर कर रही है। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उजागर किया था। शिकायतकर्ता विनोद शेखावत ने बताया कि एक दिन पहले ही उन्हें एसीबी की ओर से जांच में शामिल होने का नोटिस मिला है। शुक्रवार को उनके बयान दर्ज होने हैं। वह अपने पुराने बयान पर कायम हैं।
विज्ञापन


विभागीय कार्रवाई को लेकर उठे ये सवाल

- विभाग कार्रवाई के दोहरे मापदंड को लेकर सवालों में घिर गया है। एक ही मामले में छोटे कर्मचारियों को चार्जशीट जारी कर दी गई लेकिन बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं हुई। विभाग के संज्ञान में आने के साढ़े तीन वर्ष बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग ने हरियाणा सिविल सेवाएं (दंड एवं अपील) नियमावली 2016 के तहत ग्रुप-सी के पांच कर्मचारियों को आरोप पत्र जारी किए हैं। दूसरी ओर इसी मामले में नामित ग्रुप ए और बी स्तर के तकरीबन 9 अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

- इस मामले में सामने आया कि जिस कर्मचारी के खिलाफ लेह-लद्दाख ट्रेनिंग प्रकरण में चार्जशीट दाखिल है, उसे उसी मामले से जुड़ी शाखा की अतिरिक्त जिम्मेदारी दे दी गई। तत्कालीन अधिकारी की एसआईआर में ड्यूटी लगने के कारण ग्रुप-सी कर्मचारी को ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) शाखा का अतिरिक्त प्रभार मिला था। इससे विभागीय कार्रवाई की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी सवाल उठे थे।

- 273 दिन में 13 चरणों से गुजरी फाइल जांच के आधार पर कार्रवाई के लिए 5 जनवरी को तत्कालीन महानिदेशक डॉ. विवेक अग्रवाल के पास पहुंची और 2 फरवरी तक रही। इसके बाद यह अतिरिक्त निदेशक (तकनीकी) राज कुमार, फिर दोबारा डॉ. अग्रवाल और राज कुमार के पास गई। 27 फरवरी से 17 अप्रैल तक 49 दिन उपाधीक्षक के पास रही। इसके बाद 17 अप्रैल से 6 अगस्त तक 121 दिन तत्कालीन निदेशक के पास रही। यह किसी एक अधिकारी के पास फाइल रहने की सबसे लंबी अवधि है। इसी तरह अतिरिक्त निदेशक, निदेशक और अतिरिक्त मुख्य सचिव के दफ्तर में फाइल घूमती रही लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
विज्ञापन



फैमिली ट्रिप के आरोप से बढ़ गया था विवाद
जुलाई 2022 में गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय सचिवालय प्रशिक्षण एवं विकास संस्थान ने लेह में प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा था। आरोप है कि सरकारी ट्रेनिंग कार्यक्रम को कई अधिकारियों व कर्मचारियों ने फैमिली ट्रिप में बदल दिया। शिकायतकर्ता के अनुसार कई अधिकारी अपने परिवार और मित्रों के साथ लेह पहुंचे और सरकारी व्यवस्था का लाभ उठाया। शिकायत में दावा किया है कि कर्मचारियों के परिवारजनों ने भी होटल व भोजन सुविधाओं का लाभ उठाया। इस दौरान ट्रेनिंग कार्यक्रम के लिए 10 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। प्रति प्रतिभागी लगभग 66 हजार रुपये खर्च होने का दावा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें