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करनदीप की कहानी: नशे के कारण विदेश में पढ़ाई छूटी, सदमे में मां की जान गई... फिर ऐसे किया जिंदगी में कमबैक

Wed, 27 Nov 2024 03:21 PM IST
निवेदिता वर्मा कुलदीप शुक्ला, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंचकूला के सेक्टर-12 में रहने वाले 29 वर्षीय करनदीप सिंह जवंधा नशे के आदी थे। इस कारण उनकी सिंगापुर में पढ़ाई छूट गई। सदमे में मां ने दम तोड़ दिया। जब नशे के लिए पैसे नहीं मिलते थे तो वे घर में चोरी भी करने लगे थे। 
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करनदीप सिंह - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पिता का रियल स्टेट का कारोबार था। माता-पिता ने इकलौते बेटे को सिंगापुर में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने भेजा था। नशे की लत में फंसने से सिंगापुर में पढ़ाई छूट गई। यह सदमा मां बर्दाश्त नहीं कर सकीं और दुनिया से चल बसीं। यह कहानी है पंचकूला के सेक्टर-12 में रहने वाले 29 वर्षीय करनदीप सिंह जवंधा की। 

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नशे की लत पर विजय पाने वाले करनदीप अब स्वयंसेवी संगठन मेहर फाउंडेशन के साथ मिलकर स्कूल-कॉलेज के बच्चों के खिलाफ प्रेरित करते हैं। साथ ही करनदीप पंचकूला के एक जिम में फिटनेस ट्रेनर कम मैनेजर की नौकरी करते हैं।

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बेटे को गलत संगत से बचाने के लिए पिता ने घर बेचा

पंजाब के संगरूर स्थित धुरी के रहने वाले करनदीप ने बताया कि उन्होंने 11 साल की उम्र में दोस्तों के साथ पहली बार शराब पी थी। 16 साल की उम्र में 2014 में सिंगापुर में पढ़ाई करने गए। वहां रोजाना शराब पीकर घूमते रहते थे। घर पर जानकारी हुई तो 2016 में पढ़ाई छोड़कर पंजाब बुला लिया गया। वापस आकर अफीम, चूरापोस्त और शराब का नशा करने लगा। इकलौते बेटे को नशे का आदी देख 2017 मां ने दम तोड़ दिया। बेटे को बुरी संगत से दूर करने के लिए पिता धुरी का घर बेचकर मोहाली आ गए और दूध का व्यापार शुरू किया। 

घर से चुराने लगे थे सामान

मोहाली आकर करनदीप हेरोइन का नशा करने लगा। एक साल में घर से चुराकर 30 लाख रुपये, मोबाइल, मां के गहने, पापा की घड़ियां व कई कीमती सामान बेचकर हेरोइन खरीदी।

अर्श से फर्श पर पहुंचे पिता, नशे के लिए चोरियां की-भीख मांगी

करनदीप के नशे के कारण उनके पिता अर्श से फर्श पर पहुंच गए। ऐसा समय आ गया कि दोनों पिता-पुत्र गुरुद्वारे में लंगर खाने को मजबूर हो गए। नशे की पूर्ति के लिए करनदीप ने भीख मांगना और चोरियां करने लगा। 2022 में नशे में गाड़ी चलाते समय करनदीप हादसे का शिकार हो गए। आंखें खुलीं तो पीजीआई में मरणासन्न अवस्था में थे। इसके बाद पंचकूला के नशा मुक्ति केंद्र में इलाज शुरू कराया। अब उनका नया ठिकाना एनजीओ की तरफ से पंचकूला है।
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