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नशे का मकड़जाल: हरियाणा में 16 फीसदी लोग हेरोइन, अफीम और चिट्टा के नशे में फंसे, महिलाएं भी पीछे नहीं

Tue, 26 Nov 2024 02:09 PM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में नशा करने वालों में पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल हैं। 1.71 फीसदी महिलाएं भांग, गांजा, चरस, 0.31 फीसदी महिलाएं अफीम और हेरोइन, 0.2 फीसदी महिलाएं कोकीन का नशा करती हैं। करीब 0.28 फीसदी महिलाएं दवाओं को नशे के लिए इस्तेमाल करती हैं।
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नशे के विरुद्ध युद्ध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नशे के जाल में फंसता हरियाणा देश के उन दस राज्यों में शामिल है, जहां हेरोइन, अफीम, चिट्टा का सबसे ज्यादा नशा किया जाता है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में 16.21 फीसदी लोग हेरोइन, अफीम, चिट्टा, 10.67 फीसदी लोग गांजा, भांग व चरस, 5 फीसदी सेडिटेव्स यानी नींद के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं और 0.16 फीसदी लोग कोकीन का नशा करते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि ये सभी नशे लोगों की जिंदगी खत्म कर रहे हैं। इनके इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य के साथ सामाजिक व आर्थिक जीवन भी तहस-नहस हो रहा है।

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पीजीआई रोहतक के स्टेट ड्रग डिपेंडेंट ट्रीटमेंट विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर विनय कुमार ने बताया कि उनकी सप्ताह में तीन दिन ओपीडी होती है। प्रत्येक सप्ताह उनके पास नशे के 20 नए मरीज आते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों की संख्या कितनी तेजी से बढ़ रही है।

पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से लगते जिलों में 86 फीसदी मरीज

पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से लगते हरियाणा के जिलों में नशे के सबसे ज्यादा मामले हैं। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बीते पांच साल में अस्पतालों में पहुंचे नशे के मरीजों में से 86.7 फीसदी लोग पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से लगते हरियाणा के आठ जिलों से हैं। इनमें सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, कुरुक्षेत्र, कैथल, अंबाला, यमुनानगर और पंचकूला से आए हैं। पांच साल में कुल 14.8 लाख लोग सरकारी अस्पतालों की ओपीडी व नशा मुक्ति केंद्रों में पहुंचे। इनमें 12.9 लाख लोग इन आठ जिलों से आए थे, जिनमें सिरसा में कुल 9,03,383, पंचकूला में 1,63,938, कैथल में 88,149, हिसार में 58,147, फतेहाबाद में 39,215, कुरुक्षेत्र में 15,585 यमुनानगर में 12,100 और अंबाला में 7,708 नशा पीड़ित मरीज इलाज के लिए पहुंचे। बाकी मरीज अन्य जिलों से आए थे। राज्य में 23 नशा मुक्ति केंद्र हैं। इनमें 18 राज्य सरकार संचालित करती है और पांच रेडक्रॉस की देखरेख में चलते हैं। हालांकि प्रदेश में 64 निजी नशा मुक्ति केंद्र भी हैं, जिन पर राज्य सरकार निगरानी रखती है।

प्रचलित नशा और नुकसान

अफीम, हेरोइन, चिट्टा, ब्राउन शुगर और स्मैक : यह एक प्रकार का ओपिओइड नशा है, जिसे इंजेक्शन, सूंघकर और धूम्रपान की मदद से किया जाता है। इसके ज्यादा सेवन से मौत होने की आशंका रहती है। इसके इस्तेमाल से हृदयाघात, लिवर व किडनी का फेल होना और अवसाद होने की संभावना रहती है। हेरोइन के लती लोगों में एड्स, आक्रामक होना और आत्महत्या से मरने की संभावना ज्यादा रहती है।

कोकीन : इसकी कीमत काफी ज्यादा होती है। अन्य नशे के मुकाबले कोकीन की लत तेजी से बढ़ती है। इसके लेने से हृदय गति में वृद्धि व नसें सिकुड़ती हैं। इसके सेवन से भूख कम लगना, नींद न आना और हृदय गति रुकने के लक्षण दिखते हैं। इसका यह भी असर देखा गया है कि यह लोगों में कुछ समय के लिए ऊर्जावान व उत्साह की भावना पैदा करता है। कोकीन का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से मनोविकृति की शुरुआत, हिंसक व्यवहार और तनाव बढ़ता है।

गांजा, चरस व भांग : ओपिओइड के बाद इस नशे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसके अल्पकालिक प्रभावों से खुश, आराम, चुस्त-दुरुस्त की भावना उत्पन्न होती है। जब इसका नशा उतरता है तो नींद न आना, चिंता, उदासी, चिड़चिड़ापन और बेचैनी होती है। इसके लगातार इस्तेमाल से याद्दाश्त में कमी, एकाग्रता की समस्या, जानकारी बनाए रखने और व्यवस्थित करने में परेशानी हो सकती है।

एचआईवी पॉजिटिव और हेपेटाइटिस सी का खतरा

जो लोग इंजेक्शन से नशा लेते हैं। उनमें एचआईवी पॉजिटिव और हेपेटाइटिस सी की बीमारी होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। दोनों ही ऐसी बीमारियां हैं, जो रक्त व अन्य शारीरिक तरल पदार्थों से फैलती हैं। दरअसल नशे से पीड़ित लोग अक्सर नशे के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शन को साझा करते हैं। नशा का सेवन करने के बाद असुरक्षित यौन संबंध से एचआईवी का संक्रमण तेजी से बढ़ता है। जो लोग नशा करते हैं, उनमें एचआईवी का प्रसार ज्यादा देखा गया है।
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इलाज बीच में छोड़ने से बिगड़ती है नशा पीड़ित की स्थिति 

हमारे ट्रीटमेंट सेंटर में अधिकतर मरीज ओपिओइड्स के आते हैं। अधिकतर मरीज पंजाब से लगती सिरसा वाली बेल्ट से होते हैं। इन इलाकों में इस प्रकार के नशे का प्रसार ज्यादा है। यदि किसी मरीज को इलाज के साथ सही माहौल मिलता है तो उसमें सुधार संभव है। कई मरीज ठीक होकर गए हैं। स्थिति तब बिगड़ती है जब मरीज बीच में इलाज छोड़ देते हैं। - डॉ. विनय कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, स्टेट ड्रग डिपेंडेंट ट्रीटमेंट पीजीआई रोहतक

इलाज के दौरान नशा पीड़ित पर देना होता है सबसे ज्यादा ध्यान

नशा पीड़ित व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक, मानसिक और शारीरिक दशा बिगड़ जाती है। वह किसी काम का नहीं होता है। हमारे सामने ऐसे कई केस आए हैं, जिनमें नशा लेने वाला व्यक्ति हीरो से जीरो बन गया। जब नशा नहीं मिलता तो उनमें खुद को खत्म करने की प्रवृत्ति बढ़ती है। नशे का इलाज है, मगर जब नशा पीड़ित व्यक्ति का इलाज चल रहा होता है उसमें दोबारा से नशा लेने की भावना उत्पन्न होती है। उस समय उस पर सबसे ज्यादा फोकस करने की जरूरत होती है। यदि उस समय उसका इलाज करा लिया जाए तो व्यक्ति को दोबारा से नशा लेने से बचाया जा सकता है। - डॉ. एमपी शर्मा, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, सिविल अस्पताल पंचकूला
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