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पंचकूला में खैर की तस्करी: वरिष्ठ IFS समेत तीन अधिकारियों की मिलीभगत से कटे 1148 पेड़, प्राथमिकी की सिफारिश

Wed, 08 Apr 2026 08:15 AM IST
Nivedita कुलदीप शुक्ला, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मामले की जांच के लिए बनाई गई छह सदस्यीय एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू हो गई है। आरोप सही साबित होने पर पहले से दर्ज एफआईआर में तीनों का नाम जोड़ा जा सकता है।
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खैर के पेड़ों की तस्करी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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पंचकूला के संरक्षित वन क्षेत्र (आसरेवाली जंगल) में खैर के 1148 पेड़ कटने व उनकी तस्करी के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। 
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विभाग की प्राथमिक जांच में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन आईएफएस अधिकारी बी निवेदिता, पंचकूला के रेंज अधिकारी इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह और जिला वन्य जीव अधिकारी आरपी दांगी की लापरवाही व मिलीभगत सामने आई है।

पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव विभाग के एसीएस ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को इन तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। निर्देश मिलने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पंचकूला के पुलिस कमिश्नर से तीनों पर प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है। उन्होंने प्राथमिकी में भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा लगाने व वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
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इस मामले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी विभागीय रिपोर्ट सौंपी गई है। इसमें कहा गया है कि तीनों अधिकारियों की लापरवाही से कुल ⁠1148 पेड़ काटे गए हैं जिनमें 99 फीसदी खैर के है। कटे पेड़ों के ठूंठ को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश भी की गई है। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि इतने बड़े स्तर पर अवैध कटाई बिना अंदरखाने मिलीभगत के नहीं हो सकती है। पत्र में तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात भी है। इस मामले की जांच के लिए बनाई गई छह सदस्यीय एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू हो गई है। आरोप सही साबित होने पर पहले से दर्ज एफआईआर में तीनों का नाम जोड़ा जा सकता है।

तीनों की भूमिका

बी. निवेदिता
अंबाला कमिश्नरी और रोहतक कमिश्नरी की चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन हैं। रोहतक सर्कल में सात और अंबाला सर्कल के पांच जिलों में स्थित वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, चिड़ियाघर और कलेसर नेशनल पार्क की निगरानी की जिम्मेदारी इनके पास ही है। रिपोर्ट में लिखा कि इनकी सुपरविजन में लापरवाही हुई है जिसकी वजह से जंगल माफिया को जमकर पेड़ काटने से रोका नहीं जा सका।

सुरजीत सिंह
वाइल्डलाइफ रेंज अधिकारी होने के नाते पंचकूला के सभी संरक्षित जंगल क्षेत्र की सुरक्षा व वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी है। वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल साबित हुए।
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आरपी दांगी
बतौर जिला वन्य जीव अधिकारी के अधीन पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और कैथल के जंगल व चिड़ियाघर आते हैं। उनको हर माह में अपने कार्यक्षेत्र के अधीन आने वाले एक वन क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजनी होती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन्होंने भी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई।
 
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