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Chandigarh-Haryana News: हिसार, यमुनानगर व करनाल में दो-दो बार दिया कन्यादान योजना और श्रमिकों की मौत का मुआवजा

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कैग की रिपोर्ट में खुली सरकारी संस्थानों की लापरवाही...श्रम कल्याण बोर्ड की लापरवाही से 713.25 करोड़ की टैक्स देनदारी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की जांच में श्रम विभाग के हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बोर्ड के आयकर रिटर्न का समय पर आवेदन नहीं करने से 713.25 करोड़ रुपये टैक्स देना पड़ा।
महिलाओं के लिए सिलाई मशीन योजना के तहत खरीदी गईं 43,205 मशीनों में से 1,257 मशीनें अब तक वितरित नहीं हुईं। इससे 27.64 लाख का नुकसान हो गया। कैग रिपोर्ट में सरकारी संस्थानों की लापरवाही के चलते सरकार को करोड़ों रुपये के नुकसान का खुलासा हुआ है।
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हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने सोहना के औद्योगिक मॉडल टाउनशिप में लिथियम आयन बैटरी प्लांट के लिए 179 एकड़ का प्लॉट आवंटित किया। जुलाई 2020 में जारी आवंटन पत्र में 58.71 करोड़ रुपये का मुआवजा शामिल नहीं किया गया।
इससे 9.76 करोड़ रुपये का कम चार्ज हुआ। निगम के आयकर रिटर्न समय पर दाखिल न करने के कारण 5.06 करोड़ रुपये का ब्याज भी देना पड़ा। 2 अगस्त 2022 को गुरुग्राम में चार श्रमिकों की मौत की वजह जांच में ठेकेदार की लापरवाही मिली। सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होते तो श्रमिकों की मृत्यु को टाला जा सकता था।
प्रदेश के छह जिलों में विभिन्न योजनाओं के तहत 5.34 करोड़ रुपये के 1,267 लाभों में से 2.20 करोड़ (41.22 प्रतिशत) के 577 लाभ (45.54 प्रतिशत) अपात्रों को बांट दिए गए। यहां अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच नहीं की। इसी तरह गुरुग्राम में एक लाभार्थी ने मृत्यु प्रमाण-पत्र के आधार पर 2.15 लाख का लाभ प्राप्त किया।
इसी तरह हिसार, फरीदाबाद और करनाल में तीन आवेदकों ने पुत्रियों के विवाह के लिए कन्यादान योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था जिन्हें अस्वीकृत कर दिया गया था। बाद में इन तीनों का आवेदन स्वीकार हो गया और इन्हें दो बार 1.53 लाख का गलत लाभ दिया गया।
इसी तरह हिसार, यमुनानगर जिलों में दो मृत निर्माण श्रमिकों की ओर से आवेदन करने वालों को दो बार गलत लाभ जारी किया गया।
5.73 करोड़ की मंजूरी के बाद 36.96 करोड़ रुपये दे दिए
करनाल के कुटैल गांव में कल्पना चावला मेडिकल यूनिवर्सिटी की चाहरदीवारी के लिए मई 2016 में 5.73 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। बाद में ईंट की दीवार को उपयुक्त न मानकर आरसीसी चाहरदीवारी बनाने का फैसला लिया गया और अनुमान सितंबर 2019 तक बढ़कर 32.14 करोड़ हो गया। जून 2018 में कार्य आवंटन 3.76 करोड़ पर हुआ था लेकिन दिसंबर 2020 तक ठेकेदार को 36.96 करोड़ का भुगतान हो चुका था।
48.57 करोड़ की स्वीकृति, अब तक 114 करोड़ रुपये का भुगतान
अंबाला कैंट में स्टेडियम अपग्रेडेशन परियोजना के लिए सितंबर 2016 में 48.57 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी जबकि मार्च 2017 में 40.49 करोड़ पर अनुबंध हुआ। मार्च 2019 तक काम पूर्ण होना था लेकिन मई 2021 तक ठेकेदार को 114.03 करोड़ का भुगतान किया जा चुका था। अब भी काम अधूरा है। गुरुग्राम और फरीदाबाद में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में देरी से 83.04 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान हुआ। साथ ही संपदा प्रबंधन में गड़बड़ी से 9.76 करोड़ और गलत टैरिफ वसूली से 32.67 करोड़ का नुकसान हुआ।
98 परियोजनाओं की लागत में तय राशि से 500 फीसदी तक हुआ इजाफा
चंडीगढ़। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि हरियाणा में 2019 से 2022 के बीच हरियाणा में किए गए सार्वजनिक कार्यों की लागत में भारी इजाफा हुआ है। 11 विभागों, स्वायत्त निकायों और सार्वजनिक उपक्रमों की परियोजनाओं की जांच में सामने आया है कि परियोजनाओं के काम के लिए जिस राशि पर अनुबंध हुआ था, उसमें 50 से लेकर 500 फीसदी से अधिक तक की वृद्धि हो गई है।
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कैग के अनुसार 98 परियोजनाओं के लिए 1,134.53 करोड़ रुपये के कार्य आवंटित किए गए थे मगर उनकी लागत में 1,997.28 करोड़ रुपये की वृद्धि हो गई। कैग के मुताबिक 40 परियोजनाओं में 50 फीसदी, 27 परियोजनाओं में 50-100 फीसदी और अन्य परियोजनाओं में 100 से 500 फीसदी और चार परियोजनाओं में 500 फीसदी से ज्यादा लागत में इजाफा हुआ है। कैग ने पाया कि पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) से संबंधित परियोजनाओं में भारी लापरवाही देखने को मिली है। कैग के मुताबिक मुख्य अभियंता का कार्यालय बिना किसी प्रस्ताव के समझौते की राशि से अधिक भुगतान जारी करता रहा। ब्यूरो
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