चंडीगढ़। प्रदेश सरकार यमुना नदी में प्रदूषण को लेकर सख्त हो गई है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बैठक में यमुना नदी में गिरने वाले नालों को रोकने और निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को तय समय में पूरा करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
बैठक में 15 एसटीपी का निर्माण अगले दो साल तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह एसटीपी सोनीपत, पानीपत, बहादुरगढ़, फरीदाबाद शहर में बनाए जाने हैं। इसके साथ उन उद्योगों पर भी शिकंजा कसने के निर्देश हुए हैं, जिनका कचरा बिना ट्रीटेड सीधे यमुना नदी में गिर रहा है।
उल्लेखनीय है कि यमुना में प्रदूषण को लेकर एनजीटी सख्त रवैया अपनाए हुए है। इस बारे में कई बार हरियाणा सरकार को निर्देश दे चुका है कि हरियाणा से दिल्ली जाने वाले यमुना नदी में किसी तरह का प्रदूषण नहीं जाना चाहिए। उसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी कई बार अधिकारियों को यमुना नदी में प्रदूषण रोकने के निर्देश दे चुके हैं। इसी सिलसिले में 3 तीन जुलाई को समीक्षा बैठक रखी गई थी, जिसमें यमुना नदी में प्रदूषण को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई।
बैठक में प्रदूषण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों (आरओ) को अपने क्षेत्र में उन सभी नालों के पानी को एसटीपी से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, जिनका दूषित पानी सीधे यमुना नदी में जा रहा था। बैठक में बताया गया कि 17 गैर-अनुपालक एसटीपी को दिसंबर 2026 तक अपग्रेड कर दिया जाएगा। मौजूदा समय में एसटीपी की क्षमता उपयोग 60 फीसदी है। इसे अगले साल तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। ब्यूरो