चंडीगढ़। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर कृषि क्षेत्र में अमरीकी निर्यात के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। यह समझौता भारतीय किसानों के हितों पर सीधा हमला और आत्मनिर्भर भारत के नारे का खुला मजाक है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए कोई जगह नहीं है, क्योंकि देश पहले से ही खाद्यान्न सरप्लस है। ऐसे में आयात से किसान और अर्थव्यवस्था दोनों को नुकसान होगा।
हुड्डा ने कहा कि यह समझौता दोतरफा नहीं, बल्कि एकतरफा आत्मसमर्पण है। अमेरिकी कृषि उत्पादों को छूट देने से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था कमजोर होगी, सरकारी खरीद पर दबाव बढ़ेगा और किसान और गहरे संकट में फंसेंगे। डेयरी सेक्टर पर भी सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जहां अमेरिकी औद्योगिक कंपनियां छोटे दुग्ध किसानों को बाजार से बाहर कर देंगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सौदा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में किया गया है। किसान हित में पहले भी तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन से लेकर संसद तक लड़ाई लड़ी गई और अब इस समझौते के खिलाफ भी संघर्ष किया जाएगा।