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Chandigarh-Haryana News: आईआईएम रोहतक के निदेशक धीरज शर्मा को हाईकोर्ट से राहत

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केंद्र सरकार की ओर से योग्यता को लेकर जारी कारण बताओ नोटिस खारिज
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केंद्र सरकार ने जारी किया था नोटिस, तकनीकी आधार पर हुआ खारिज

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आईआईएम रोहतक के निदेशक धीरज शर्मा को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार की ओर से उनकी योग्यता को लेकर जारी किया गया कारण बताओ नोटिस तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस उस प्राधिकरण ने जारी किया था, जो इसके लिए अधिकृत नहीं था।
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जस्टिस कुलदीप तिवारी के समक्ष दो अलग-अलग याचिकाएं पहुंची थी, जिनमें शर्मा की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि शर्मा के पास प्रथम श्रेणी की डिग्री नहीं है, जो निदेशक पद के लिए आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, धीरज शर्मा ने भी एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने 28 मार्च 2022 को जारी उस कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उनसे पूछा गया था कि उन्होंने स्नातक में द्वितीय श्रेणी प्राप्त होने की जानकारी छिपाकर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश क्यों की। इस नोटिस में आरोप था कि शर्मा ने लगभग पांच सालों तक अपनी स्नातक की डिग्री प्रस्तुत नहीं की थी। इसके जवाब में शर्मा ने यह तकनीकी आपत्ति उठाई कि उक्त नोटिस भारत सरकार के अवर सचिव की ओर से जारी किया गया था, जो नियमों के अनुसार नियुक्ति प्राधिकारी नहीं था और इसलिए उसे यह अधिकार ही नहीं था। हाई कोर्ट ने शर्मा की नियुक्ति को सही ठहराया और उनके 15 सालों के अनुभव पर उठाए गए सवालों वाली याचिका को भी खारिज कर दिया। याचिका में आरोप लगाया था कि उनकी बैचलर, मास्टर्स और एमबीए की डिग्रियां संदिग्ध परिस्थितियों में प्राप्त हुई थीं। हालांकि, अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके, जैसे कि संबंधित विश्वविद्यालयों या कॉलेजों से ऐसे दस्तावेज जिनसे यह साबित हो कि डिग्रियां जाली या फर्जी हैं। इस प्रकार, अदालत ने तकनीकी और साक्ष्य के अभाव में याचिकाओं को खारिज करते हुए धीरज शर्मा को राहत दी है।
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